जेटली जी और मतदाता का गणित
जेटली जी और मतदाता का गणित
कहाँ है सबका साथ और सबका विकास की ईमानदार प्रस्तुति
जसबीर चावला
जेटली जी के बयान को ग़ौर से सुनिये जो बतला रहे हैं कि हमसे चुनाव में गणित की गल्ती हो गई. गल्ती यह कि लालू प्रसाद नीतीश कुमार और कांग्रेस के एक हो जाने के बाद भी तीनों का वोट एक दूसरे को नहीं जायेगा.
आशय स्पष्ट है कि सारा चुनाव वोटर को आम स्वतंत्र चेता मतदाता न मानकर एक सिर, एक इकाई, एक विचार शून्य रोबोट मानकर जोड़तोड़ से लड़ा गया.
मतदाता को अपने दल की नीतियों, कार्यों से प्रभावित न कर एक कमोडिटी, एक पदार्थ समझा गया और उसे लुभाने के लिये हर प्रकार का चारा फेंका गया.
ऊंची जाति नीची जाति, अगड़ा-पिछड़ा, दलित महादलित, आरक्षण अनारक्षण, हिंदू मुसलमान, गाय, पाकिस्तान बीफ, विकास धर्म जैसे सारे नुस्ख़े, जुमले, हथकंडे अपनाये गये.
माँझी महादलित, पासवान कुनबा दलित, मुलायम सिंह पप्पू साधु यादव, कुशवाह ऐसा कौन सा पत्ता या जोकर नहीं था, जो नहीं चला गया.
चारे में जब स्कूली बच्चियों के लिये स्कूटी फेंकी गई तब मतदाता को मछली माना गया.
पर फ़िर भी बकौल जेटली हार में गणित की भूल थी. हार में किसी की कोई गल्ती नहीं है. कोई 10 वर्ष पूर्व ऐसे ही किसी सन्दर्भ में दिग्विजय सिंह जी ने भी कहा था कि चुनाव प्रबंधन से लड़ा जाता.
कहाँ है सबका साथ और सबका विकास की ईमानदार प्रस्तुति जब कि मतदाता को मात्र गणित का अंक मानकर जोड़ बाकी कर जोड़तोड़ से संख्या बढाने का प्रयास हो रहा हो.
जेटलीजी को ईमानदार स्वीकारोक्ति के लिये बधाई. हार की ज़िम्मेदारी तय करनें लिये किसी मंथन की आवश्यकता अब कहाँ है. जब यही एजेंडा था धर्म, गाय, आरक्षण पर फ़ोकस किया जाना था. वोटों का ध्रुवीकरण बहुसंख्यक अल्पसंख्यकों के बीच करने का प्रयास अंतिम समय तक किया गया. ऐसे में जेटली वकील साहब ठीक कह रहे हैं हार कि सबकी सामूहिक जवाबदारी है.
हाँ बली के बकरे शत्रुघ्न सिन्हा और आर पी सिंह हैं हीं, जिनमें से शत्रुघ्न खुद भी चाहते हैं कि उनकी बलि पार्टी ले ले ताकि वे अपना कद ऊँचा कर सकें.
दोनों को इस गणित में फायदा ही फ़ायदा है.


