जेपी समूह के हाथों की कठपुतली बना पंचम तल
जेपी समूह के हाथों की कठपुतली बना पंचम तल
हर तरफ लूट मची है। कोई जमीनी खोड रहा है तो कोई पटकाल। धूप (आसमान) और हवा भी इससे अछूती नहीं है। प्रकृति के चीहरों में तो हर कोई एक-दूसरे को मात देना चाहता है। गांव से लेकर राजधानी तक। हर जगह बिछा है शिकार का एक जाल। इस जाल में उलझे हैं राजनेता और नौकरशाही लेकिन तड़प रहा है आम इंसान। पढ़िए ऐसे ही एक जाल से रू-ब-रू कराती यह विशेष रिपोर्ट-
शिव दास प्रजापति
लखनऊ। सोनभद्र जिले के पूर्व वन बंधोबस्त अधिकारी वी.के. श्रीवास्तव (अब सहायक अधिकारी, मिर्जापुर) ने जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (जेडएएल) नामक निजी कंपनी के पक्ष में वन विभाग की 1083 हेक्टेयर (करीब 2483 बीघा) से ज्यादा संक्षित वन भूमि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और वन संक्षिण अधिनियम के प्रवधानों के खिलाफ निकाला दी। इसके बावजूद सत्ता में काबिज राजनैतिक पार्टियों के नुमाइंदों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती। इतना ही नहीं, राज्य की पूर्व्वरत्तीय बसपा सरकार ने इन कारनामों को अमलीजामा पहनाने के लिए अधिसूचना भी जारी कर दिया। हालांकि उसके मंसूबे सुप्रीम कोर्ट की वजह से पूरे नहीं हो पाए लेकिन संक्षिथ वन भूमि पर कब्जा करने का जेपी समूह का सिलसिला जारी है। वह पंचम तल और जि़ले प्रशासन के सहायोग से चोरी-छिपे उसे...


