तीन लेखकों की हत्या – मेरे देश की संसद मौन क्यों है ?
तीन लेखकों की हत्या – मेरे देश की संसद मौन क्यों है ?
क्या लेखक -बुद्धिजीवी चुप रहें और पिटते रहें ?
जगदीश्वर चतुर्वेदी
श्याम बेनेगल साहब सवाल यह है कि एवार्ड लौटाना समाधान नहीं है तो लेखक-बुद्धिजीवी क्या करें ? यहां तक कि राज्यसभा में तो कई लेखक, सिनेकर्मी आदि सदस्य हैं, उन्होंने भी पहल करके राज्यसभा में तीन लेखकों की हत्या की निंदा करने वाला प्रस्ताव तक पेश नहीं किया। सरकार ने कोई पहल लेखकों से बात करके समाधान निकालने के लिए नहीं की। क्यों प्रधानमंत्री से लेकर गृहमंत्री तक हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं?
यदि राष्ट्रपति को लगता है कि लेखकों को इनाम को सहेजकर रखना चाहिए, तो वे कम से कम केन्द्र सरकार को सीधे कह सकते हैं कि लेखकों से बुलाकर बात करो और उनको सुरक्षा का भरोसा दो।
देश के लेखक किस तरह विश्वास करें कि उन पर हमले नहीं होंगे
क्या लेखक -बुद्धिजीवी चुप रहें और पिटते रहें ? अफसोस यह है कि 3 लेखकों की हत्या पर न तो यूपीए सरकार जागी और न एनडीए सरकार की अब तक नींद खुली है। अफसोस की बात यह है कि संसद ने तीन लेखकों की सरेआम हत्या की निंदा करते हुए एक प्रस्ताव तक पास नहीं किया है। देश के लेखक किस तरह विश्वास करें कि उन पर हमले नहीं होंगे, अभी तक हमलावर संगठनों पर पाबंदी नहीं लगी है।
वी के सिंह ने बताया एवार्ड वापसी पर मोदी सरकार का रुख
मोदी सरकार एवार्ड वापसी पर किस तरह सोचती है इसका साक्षात प्रमाण है केन्द्रीयमंत्री वी के सिंह का बयान, यह बयान लेखकों का सरेआम अपमान है। खासकर उन लेखकों का जो प्रतिवाद में एवार्ड लौटा रहे हैं, क्या इस मंत्री को कोई सरकार से हटा सकता है, क्या इस तरह के गैर-जिम्मेदार बयान पर आपत्ति करके पीएम-राष्ट्रपति कोई बोलेगा। जी नहीं, इस मामले में सारे स्वर-सारे रंग मिले हुए हैं, वरना एक मंत्री की बेबुनियाद आरोप लगाने की हिम्मत कैसे हुई कि वह यह कहे कि लेखकों ने पैसा लेकर असहिष्णुता की बहस छेड़ी है। मंत्री या तो प्रमाण दें या फिर लेखकों से माफी मांगे।
असहिष्णुता की कोटि में ही आता है वीके सिंह का बयान
यह विभिन्न राजनीतिक दलों और मीडिया की भी जिम्मेदारी है कि वीके सिंह को प्रमाण देने के लिए कहें या फिर माफी मांगने के लिए कहें। केन्द्रीय मंत्री का यह बयान असहिष्णुता की कोटि में ही आता है।


