तीसरा प्रेस आयोग !
तीसरा प्रेस आयोग !
प्रभाष परम्परा न्यास के तत्त्वाधान में बीती 5 जून को दिल्ली में ITO स्थित शिव मंदिर में एक संगोष्ठी हुई। विषय था तीसरे प्रेस आयोग का गान। देश के छोटे के पत्रकार इस गोष्ठी में एकत्र हुए और विषय पर गंभीर चर्चा हुई। इस गोष्ठी में किसने क्या कहा यह भी हम आपको बताएंगे लेकिन पहले वरिष्ठ पत्रकार श्री रामशरण जोशी द्वारा प्रस्तुत उस पेपर को आपके सामने रख रहे हैं जिस पर चर्चा हुई। यदि आपकी भी इस विषय पर कोई राय या सुझाव है तो हमें [email protected] पर भेजें हम आपके सुझाव आगे प्रस्तुत कर देंगे।
क्यों चाहिये तीसरा प्रेस आयोग ?
(चर्चा का प्रारूप)
-रामशरण जोशी
विगत दो दशकों से हम वैश्विकरण के परिवेश में जी रहे हैं। इस अवधिधीन भारतीय गणतंत्र की लगभग सभी महत्वपूर्ण संस्थाएँ वैश्विक पुनर्वाद से कम-अधिक प्रभावित हुई हैं। इन संस्थाओं के चरित्र और कार्यशैली में गुणात्मक परिवर्तन आया है। इस संदर्भ में भारतीय राज्य को ही देखें। कभी इसकी कर्ता-धर्ता इसे ‘जनकल्याणकारी राज्य’ घोषणित करने में गर्व का अनुभव करती थी। आज यह ‘फैसलीटीटर’ की भूमिका निभाएगा। यह ‘मुख्त आरथ्व्यवस्था’ को उस पर निर्भर कर सकती है। अब कर्ताधर्ताओं का बाज़ारोन्मुख नाराज़ है- सुविधाएँ उपलब्ध कराती अर्थव्यवस्था अब ‘फैसलीटीटर’ की भूमिका निभाएगी।


