तीस्ता सीतलवाड़ के समर्थन में उतरे देश भर के बुद्धिजीवी
तीस्ता सीतलवाड़ के समर्थन में उतरे देश भर के बुद्धिजीवी
तीस्ता सीतलवाड़ के समर्थन में उतरे देश भर के बुद्धिजीवी
नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता और वरिष्ठ पत्रकार तीस्ता सीतलवाड़ का मोदी सरकार द्वारा द्वेषवश उत्पीड़न किए जाने के विरोध में देश भर के बुद्धिजीवी एकजुट हो गए हैं।
प्रोफ़ेसर दीपक मालिक, डायरेक्टर, गांधीयन इंस्टीट्युट्स, विभूति नारायण राय, पूर्व पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश, प्रोफ़ेसर रूपरेखा वर्मा, प्रोफेसर महेश विक्रम सिंह, डॉ स्वाति, डॉ संदीप पण्डे, नीति भाई, प्रोफ़ेसर वसंती रमण, प्रोफेसर मधु प्रसाद, अफलातून, फादर चंद्रकांत, फादर आनंद, अब्दुल्लाह खान, आनंद वर्धन, डा0 लेनिन रघुवंशी, डॉ बल्लभाचार्य पण्डे, डॉ नीता चौबे, डा0 मुनीज़ा खान, कुसुम वर्मा, व्योमेश शुक्ल, श्रुति नागवंशी, नन्दलाल, मेहदी बख्त, नसीम खान, प्रोफ़ेसर कमरजहाँ, उत्पला शुक्ला, हाजी इश्तियाक, फादर दिलराज, बिंदु सिंह, धनञ्जय त्रिपाठी व डा0 मुनीज़ा रफ़ीक खान ने एक संयुक्त वक्तव्य जारी करके कहा है कि गुजरात 2002 के दंगो की तमाम धमकियों व दबावों के बावजूद लगातार बेख़ौफ़ पैरवी कर रही सामजिक कार्यकर्ती तीस्ता सीतलवाड़ की संस्था की जाँच केंद्र सरकार के कहने पर अब सी बी आई द्वारा कराने की खबर आयी है। अन्य एजेंसीज द्वारा जाँच करा लेने पर जब कुछ गलत नहीं मिला तो अब सी बी आई को जाँच के लिए दिया जा रहा है।
इन बुद्धिजीवियों का कहना है कि तीस्ता एवं उनकी टीम का दोष ये है कि वो सरकार के आगे घुटने नहीं टेक रही हैं, मजबूती व बहादुरी से हर चुनौती का सामना कर रही हैं। तीस्ता सीतलवाड़ गुजरात में अनेक ताकतवर लोगों के खिलाफ दोषियों को सजा दिलाने के लिए मुकदमा लड़ रही हैं। अधिकतर मुकदमो मे पैरवी न होने के कारण अपराधी अदालतों से बरी हो जाते हैं, लेकिन गुजरात दंगे में तीस्ता और उनकी टीम द्वारा पैरवी करने के कारण ही 117 दोषियों को अदालत द्वारा आजीवन कारावास की सजा हुई है, जिसमे बड़े राजनैतिक नेता, आईपीएस अधिकारी समेत अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल हैं। अभी भी कुछ लोगों के खिलाफ अदालत में मामला लंबित है, जिसकी पैरवी तीस्ता द्वारा किया जा रहा है, जिसके कारण पूर्व में भी तीस्ता को सांप्रदायिक ताकतें धमकिया दे रही थीं कि इस केस में पैरवी बंद कर दें। लेकिन तीस्ता द्वारा लगातार पैरवी जारी रखी गयी। इसी कारण उनको कभी झूठे केस में फसाया जा रहा है तो कभी फंड्स की हेरा फेरी में। इसके पूर्व में भी कई सामजिक कार्यकर्ताओ ने कई वर्ष झूठे केस के आरोप में जेल में गुज़ारे हैं और बाद मे अदालत ने उन्हें बाईज्जत बरी भी किया है।
जाने-माने बुद्धिजीवियों ने कहा, “हम गुजरात 2002 मे हुए जनसंहार मे मारे गए व उजाड़ दिए गए पीडितो के न्याय के लिए लड़ रही तीस्ता को साजिशन फ़साने व उनके काम मे रुकावट डालने की मंशा से लगातार जाँच पर जाँच होने के इस कृत्य की कड़े शब्दों में निन्दा करते है लोकतंत्र मे इस तरह का कृत्या अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला है हम इस लोकतांत्रिक देश में अराजकता का हर स्तर पर विरोध करेंगे और एकजुट होकर इस तरह की साजिश को नाकाम करने का पूरा प्रयास करेंगे”


