नियति
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तुम अवाक रह जाते
मुँह खुला रह जाता
चीख भी न पाते
अचंभे में पड जाते
उन्हे देख भी न पाते
अगर वे चीते से दबे पाँव आते
तुमसे छीन लिये ये सारे अनुभव
वे बाजे गाजे के साथ आते हैं
सामने दिखते हैं
उठा ले जाते हैं
और तुम्हे इन अनुभवों से वंचित कर देते हैं
जसबीर चावला