जुलेखा ज्हाबीं

“यत्र नारीषु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवताः” (जहाँ औरतों की पूजा होती है वहाँ देवता वास करते हैं) जैसे कथन को मानने वाले हिंदू बहुत देश हिंदोस्तान की औरतें आज जानवरों से भी बदतर जिन्दगी जीने को मजबूर हैं। जहाँ एक तरफ इंडिया शाइनिंग का नारा देने वाली बहुत से हज़ार सालों से जी रही हैं, तो दूसरी तरफ भारत और इंडिया के नाम से देश के विकास को बांटने वाली औरत की आज़ादी बिरोधी विचाधाराओं भी है। और इन दोनों विचारधाराओं के समरथकों के स्थ्ताधीन होने के बावजूद हिंदोस्तान की बेटियाँ न सिर्फ आज़ाद नागरिक अधिकार प्राप्त कर पाईं हैं और नहीं उन्हें एक इंसान का सम्मान दिया जा रहा है। तेज़ी से विकसित होते भारत में भौतिक विकास तो चरम की तरफ है मगर नागरिका विकास में भारत लगातार पिछड़ता जा रहा है। विकास के नाम पर आदिवासियों/आम जनता खासकर औरतों की ज़िम्मेदारी को जिम्मेदारी बनाने वाली आज़ादी बिरोधी विचारधाराएँ भी हैं। और इन दोनों विचारधाराओं के समरथकों के स्थ्ताधीन होने के बावजूद हिंदोस्तान की बेटियाँ न सिर्फ आज़ाद नागरिक अधिकार प्राप्त कर पाईं हैं और नहीं उन्हें एक इंसान का सम्मान दिया जा रहा है। तेज़ी से विकसित होते भारत में भौतिक विकास तो चरम की तरफ है मगर नागरिका विकास में भारत लगातार पिछड़ता जा रहा है। विकास के नाम पर आदिवासियों/आम जनता खासकर औरतों की ज़िम्मेदारी को जिम्मेदारी बनाने वाली आज़ादी बिरोधी विचारधाराएँ भी हैं।