… तो अखिलेश यादव के मुकाबिल होंगे आदित्य यादव !
… तो अखिलेश यादव के मुकाबिल होंगे आदित्य यादव !
… तो अखिलेश यादव के मुकाबिल होंगे आदित्य यादव !
… सपा की गाजीपुर रैली में शिवपाल यादव के बेटे को भेंट की गई गदा
… रैली में न पहुंचने पर मुलायम ने अखिलेश यादव को जिद्दी भी कहा
रतिभान त्रिपाठी
लखनऊ, 25 नवम्बर : समाजवादी पार्टी में जिस तरह से नए-नए घटनाक्रम सामने आ रहे हैं, उनसे लगता नहीं कि इसका झगड़ा खत्म होने वाला है। चाचा-भतीजे की रार बढ़ती ही दिख रही है। इसकी बानगी पार्टी की गाजीपुर रैली में देखने को मिली जहां मंच पर प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव के पुत्र आदित्य यादव गदा थामे नजर आए।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तो रैली में पहुंचे नहीं, लिहाजा मौका देख शिवपाल यादव ने अपने बेटे आदित्य की एक तरह से लांचिंग करा दी।
ऐसे में अब यह बात चल पड़ी है कि शिवपाल यादव अब खुद नहीं बल्कि अपने बेटे आदित्य के जरिए भतीजे का मुकाबला करेंगे।
समाजवादी पार्टी युवा राह पर कदम रख चुकी है। पिछले कई कार्यक्रमों में इसकी बानगी देख पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव ने नई रणनीति अख्तियार की है। प्रदेश अध्यक्ष होने के कारण संगठन में अपनी तगड़ी पकड़ का फायदा अपने बेटे आदित्य यादव को दिलाना चाहते हैं। युवाओं का अखिलेश यादव के प्रति बढ़ता रुझान देख शायद उन्हें लगने लगा है कि उम्र के जिस मुकाम पर हैं, वहां से अखिलेश जैसा आकर्षण नहीं हासिल कर सकते। लिहाजा अपने बेटे आदित्य यादव को आगे कर दिया है।
बुलाने के बावजूद अखिलेश यादव के रैली में न पहुंचने की हालत में आयोजकों ने आदित्य को मंच पर बुलाया और सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव व शिवपाल की तरह उन्हें को भी गदा भेंट की। आदित्य गदा लेकर मंच पर लहराते रहे। इस बीच रैली में कई बार उनके जिंदाबाद के नारे और तालियों की गड़गड़ाहट भी गूंजी।
इतने बड़े मंच पर आदित्य की मौजूदगी और इस तरह के अभिनंदन का यह पहला मौका था। इस पर वहीं कानाफूसी शुरू हो गई कि शिवपाल यादव मानेंगे नहीं। वह अखिलेश यादव को उनकी हर क्रिया पर प्रतिक्रिया देंगे, भले ही इसके लिए उन्हें कोई नया तरीका अपनाना पड़े।
आदित्य को गदा भेंट कराना अखिलेश की भरपाई जैसा कदम ही है।
गौरतलब है कि इस मंच पर भी पार्टी में मतभेदों की आहट सुनी गई। खुद मुलायम सिंह यादव ने अखिलेश यादव को जिद्दी कहा। कई और ऐसी बातें कहीं, जो अखिलेश यादव के खिलाफ थीं। लेकिन राजनीतिक विश््लेषक इसे मुलायम सिंह यादव की रणनीति मानकर चल रहे हैं।
विश्लेषक कहते हैं वह सीधे तौर पर शिवपाल यादव को नाराज नहीं कर सकते लिहाजा अपने बेटे को ही कुछ कहकर उनका मन हल्का कर देते हैं।
कहा जा रहा है कि कौमी एकता दल का सपा में विलय करने वाले अंसारी बंधुओं का उस मंच पर वर्चस्व था और अखिलेश यादव अपनी छवि की खातिर उनसे मंच साझा नहीं करना चाह रहे थे, इसीलिए रैली में नहीं गए। लेकिन ऐसे जो भी घटनाक्रम हो रहे हैं, वह कहीं न कहीं से पार्टी की एकता को झटका दे रहे हैं और कार्यकर्ताओं तक यह संदेश पहुंचा रहे हैं कि चाचा-भतीजे का झगड़ा खत्म हुआ नहीं।
हालांकि सपा प्रवक्ता मोहम्मद बचाव करते हुए कहते हैं कि प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री के बीच कोई विवाद है ही नहीं और जहां तक आदित्य यादव की बात है तो वह पहले से पीसीएफ के चेयरमैन हैं। राजनीति में सक्रिय हैं। गाजीपुर के कार्यक्रम में उन्हें गदा भेंट किए जाने का कार्यक्रम मुख्यमंत्री से मुकाबला करने जैसी बात नहीं है।
(देशबन्धु से साभार)


