तो बलात्कार और हत्या की नींव पर “ हिंदू राष्ट्र ” का निर्माण होगा !
तो बलात्कार और हत्या की नींव पर “ हिंदू राष्ट्र ” का निर्माण होगा !
“ हिंदू राष्ट्र ” के लिए
विधर्मियों के खून से “ हिंदू राष्ट्र ” के सूखी-मरती-सड़ती नदियों में प्राण का नया प्रवाह होगा।
एक खूंखार योगी इस देश को हिंदू राष्ट्र बनाना चाहता है। और इस देश को हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए सबसे बेहतरीन उपाय क्या हो सकता है? इसका नुस्खा योगी के चेले ने दिया है – मुसलमानों की औरतों से तब तक बलात्कार करो जब तक वे मर न जाएं! यह बात योगी का चेला किसी “विराट हिंदू चेतना रैली” में कहता है। मुझे इस उकसावे से कोई आश्चर्य नहीं हुआ। न ही मुझे कोई आवेग या गुस्सा है। क्योंकि मुझे मालूम है हिंदुओं के लिए यह उकसावे की बात नहीं है। वह तो सदियों से कभी इज्जत के लिए और कभी दहेज के लिए अपनी औरतों को जलाता-काटता रहा है। औरतों की हत्या के ऐसे ऐतिहासिक 'ड्रेस रिहर्सल' का कोई दूसरा उदाहरण मिलना मुश्किल होगा। सो हिंदू चेतना ऐसे छोटे-मोटे उकसावों से भ्रमित होने वाली नहीं है मुझे पक्का यकीन है।
लेकिन एक सवाल मेरे मूर्ख मन में कौंध रहा है। अगर औरतों की हत्या हिंदू चेतना का हिस्सा रही है तो “हिंदू चेतना सम्मेलन” में इसे यों ही क्यों दुहराया जा रहा है? लेकिन इसका भी जवाब मिल गया है। पहले से मौजूद इस चेतना को “ हिंदू राष्ट्र ” निर्माण के लिए नई दिशा में मोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। योगी आदित्यनाथ का चेला कहना चाहता है कि हिंदुओं अभी कुछ समय के लिए अपनी औरतों को मत मारो। क्योंकि “ हिंदू राष्ट्र ” को आगे बढ़ाने के लिए तुम्हे हिंदू औरतों के कोख की जरूरत पड़ेगी। यानी इस ऐतिहासिक घड़ी में दहेज कम भी मिले तो संतोष कर लो अपनी बहू को जलाओ मत। उससे बच्चे पैदा करवाओ – हिंदू बच्चे जो हिंदू मर्द बन सकें (लेकिन अगर हिंदू बहू लड़कियां पैदा करेगी तब क्या? ऐसी बहू “ हिंदू राष्ट्र ” के किस काम की। इसके बारे में हिंदू मर्द अपनी ऐतिहासिक हिंदू चेतना के आधार पर विचार करें)। एक फरमान पहले ही आ चुका है। हिंदू स्त्रियों को चार बच्चे पैदा करने चाहिए। तो हिंदू मर्द पैदा करने के लिए हिंदू स्त्रियों को जिंदा रखना होगा। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इसमें केवल सवर्णों की स्त्रियां ही शामिल हैं या दलितों की भी स्त्रियां शामिल हैं। वैसे हिंदू इस मामले में बड़े उदार रहे हैं। स्त्री के मामले में छूत-अछूत का भेद हिंदू चेतना नहीं करती है। और जब “ हिंदू राष्ट्र ” के निर्माण का ऐतिहासिक सवाल खड़ा है तो बिल्कुल नहीं करना चाहिए। तभी तो योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि हिंदुओं को छूआछूत नहीं मानना चाहिए।
अब अगर इस हिंदू चेतना के लेखे हिंदू औरत हिंदू मर्द पैदा करने की फैक्टरी है तो निश्चित तौर पर मुसलमान औरत मुसलमान बच्चे पैदा करने की फैक्टरी होगी। तो फार्मूला सीधा है – अगर प्रतिद्वन्दी की फैक्टरी में आग लग जाए तो उसका माल-उत्पादन ठप हो जाएगा। अगर मुसलमान औरते नहीं रहेंगी तो मुसलमान ही नहीं रहेंगे। सो “ हिंदू राष्ट्र ” के निर्माण का तकाज़ा है कि मुसलमान औरतों को बलात्कार करके मारा जाए।
बलात्कार और हत्या की नींव पर “ हिंदू राष्ट्र ” का निर्माण होगा। फिर इस “ हिंदू राष्ट्र ” को बनाए रखने के लिए हत्याएं होंगी। मुसलमानों की, नास्तिकों की, ईसाइयों की, जिंस पहनने वाली औरतों की, राष्ट्र की पवित्रता भंग करने वाले अछूतों की, प्रेमिकाओं-प्रेमियों की, “ हिंदू राष्ट्र ” निर्माण के लिए मजदूरी की मांग करने वाले मजदूरों की, “हिंदू राष्ट्र” के जंगलों पर हक़ जताने वाले आदिवासियों की...। “ हिंदू राष्ट्र ” एक बहुत बड़ा बूचड़खाना होगा। विधर्मियों के खून से “ हिंदू राष्ट्र ” के सूखी-मरती-सड़ती नदियों में प्राण का नया प्रवाह होगा। मैं योगी आदित्यनाथ से पूछना चाहूंगा कि “ हिंदू राष्ट्र ” के भूखे-कुपोषित बच्चों को क्या खिलाओगे? विधर्मियों का गोश्त? गोश्त पौष्टिक होता है। लेकिन विधर्मी का गोश्त खाकर बच्चा सच्चा हिंदू मर्द बनने से चूक गया तब क्या करोगे?
“हिंदू राष्ट्र” के निर्माण में और भी बाधाएं हैं। मसलन, “ हिंदू राष्ट्र ” में बच्चों की शिक्षा-दीक्षा कहां होगी? गुरुकुलों में या प्राइवेट स्कूलों में? अब अगर हिंदू-राष्ट्रवादी प्राइवेट स्कूलों पर ताला लगाने की बात सोचेगा तो राष्ट्रवाद की फंडिंग पर संकट आ सकता है। मेरा सुझाव है कि प्राइवेट स्कूलों को रहने देना चाहिए बशर्ते कि वे रोज सरस्वती-वंदना और सूर्य-नमस्कार करें और लड़कियों को चूल्हा-चौका और बच्चे पैदा करने वाली आदर्श हिंदू स्त्री बनने की अनिवार्य शिक्षा दें। वैसे भी गुरुकुल खोलने के लिए जंगल कहां से लाओगे। जो बचे-खुचे जंगल हैं उनकी जरूरत राष्ट्रवाद की फंडिंग करने वालों को ज्यादा है।
एक और संकट है विदेशी पूंजी का। पूंजी का अपना धर्म नहीं मगर जिसकी जेब से आ रही है उसका तो है। विधर्मियों की पूंजी! और राष्ट्र का प्रधानमंत्री इसके स्वागत में दस लाख का सूट पहन तालियां पीट रहा है। और क्यों न करे – फंडिंग का सवाल है। इसका उपाय यह है कि समूची विदेशी पूंजी के लिए योगी आदित्यनाथ के “गोरक्ष पीठ” में एक खाता खोल दिया जाए। विदेशी पूंजी पहले यहां आए फिर उसका धर्मपूर्वक शोधन कर आगे बढ़ाया जाए। इस तरह “हिंदू राष्ट्र” की पूंजी भी धर्मप्राण हिंदू ही रहेगी।
“हिंदू राष्ट्र” में शेयर मार्केट रहेगा कि नहीं मैं यह “हिंदू चेतना” पर छोड़ देता हूं। मुझे यकीन है कि नवीन “हिंदू चेतना” इस संकट का कोई-न-कोई हल तो निकाल ही लेगी। जिस तरह इसने “औरत” की समस्या का हल हत्या और बलात्कार से निकाला है वैसे ही दूसरी समस्याओं का भी हल निकाल लेगा यह भरोसा हमे होना चाहिए।
- लोकेश मालती प्रकाश


