थानवी जी की उदार दुनिया, जहाँ आदमी और आदमखोर साथ रहेंगे
थानवी जी की उदार दुनिया, जहाँ आदमी और आदमखोर साथ रहेंगे
कल के जन संहारक व खलनायक आज के राष्ट्रनायक व जन प्रतिपालक होंगे।
थानवी जी की यह दुनिया, है न अदभुत दुनिया !
कौशल किशोर
ओम थानवी जी आजकल एक नई दुनिया बनाने व बसाने में जुटे हैं। वे साधन सम्पन्न हैं, वरिष्ठ पत्रकार व ‘जनसत्ता’ के संपादक हैं। उनकी बड़ी मित्र मंडली है। उन्हें फेसबुक पर ‘पसंद’ क्लिक करने वाले लोगों की भरमार है। ऐसे में वे एक नई दुनिया बसा ही सकते हैं। उनकी यह दुनिया उदारतावादी है। इतनी उदार कि यहाँ आदमी और आदमखोर साथ साथ रहेंगे। आदमी को आदमखोरों से भय नहीं होगा। आदमखोर भी आदमी का भक्षण नहीं करेंगे। वे आदमी से दोस्ती करेंगे। इनके बीच प्रेम होगा, मेल मिलाप व भाईचारा होगा। हिंसा के लिए जगह नहीं होगी। कल के जन संहारक व खलनायक आज के राष्ट्रनायक व जन प्रतिपालक होंगे। थानवी जी की यह दुनिया, है न अदभुत दुनिया !
थानवी जी की इस दुनिया में मुक्तिबोध और ‘तय करो किस ओर हो तुम, आदमी के साथ हो या आदमखोर हो’ जैसी बातें बेमानी होगी। यहां विवाद नहीं, संवाद होगा। अरुंधती राय का गोविंदाचार्य से संवाद होगा, वहीं वरवर राव, योगी आदित्यनाथ के साथ विमर्श में होंगे। पर उन्हे वामपंथी रचनाकारों से शिकायत है कि वे संवाद होने देना नहीं चाहते। वामपंथियों का संकीर्णता से गहरा नाता है। हर अच्छे काम में टांग अड़ा देते हैं, अपनी नाक घुसेड़ देते हैं। विरोध करना इनके रक्त में है। संवाद करना तो जानते ही नहीं। लोकतंत्र के लिए बड़े खतरनाक हैं, फासिस्टों से भी।
थानवी जी उदारता, समन्वय व सह अस्तित्व वाली दुनिया बनाना चाहते हैं। ऐसी दुनिया बन नहीं पा रही है इसलिए खीझे हुए हैं और अपनी खीझ आजकल फेसबुक से लेकर ‘जनसत्ता’ पर उतार रहे हैं। इस तरह उनका खीझना क्या उचित है ?
कौशल किशोर की फेसबुक वॉल से


