दलितों की कोई भी एफआईआर दर्ज नहीं करे पुलिस ?
दलितों की कोई भी एफआईआर दर्ज नहीं करे पुलिस ?
करनाल। जातिवाद और महिला विरोध के लिए कुख्यात हरियाणा में दलित-महिला अत्याचार के खिलाफ पिछले नौ दिनों से दलित महिला कार्यकर्ताओं का एक समूह प्रदेश के प्रत्येक पीड़ित व्यक्ति/ परिवार से मिलकर यहाँ सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर रहा है। अपने अंतिम दिन कारवां ने करनाल लघु सचिवालय पर अपना धरना देते हुए डी सी को ज्ञापन देना चाहा परन्तु प्रशासन ने उल्टा दलित महिलाओं से बदसलूकी करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
एक प्रदर्शनकारी मित्र गुरिंदर सिंह आज़ाद ने बताया कि जब डीसी की गाड़ी कार्यालय से निकली तब महिला प्रदर्शनकारियों ने उन्हें रोककर ज्ञापन देना चाहा लेकिन डीसी ने ज्ञापन लेने से साफ़ इनकार कर दिया। तब प्रदर्शनकारी महिलाएँ उनकी गाड़ी के आगे लेट गयीं लेकिन हरियाण के जातिवादी-महिला विरोधी प्रशासन ने पीड़ित महिलाओं की बात सुनना तों दूर उल्टा उन पर बल प्रयोग कर दिया और इसका शिकार एक ऐसी दलित महिला हुई जिसकी पांच साल की बच्ची का १२ कमीने पुरुषों ने बलात्कार किया था. ... आज़ाद ने बताया कि इतना ही नहीं हरियाणा पुलिस ने महिला प्रदर्शनकारियों के कपड़े तक फाड़ने की कोशिश की ....वैसे भी कुछ दिनों पहले हरियाणा पुलिस जनवादी महिला समिति की महिलाओं को लाठी से पीटकर अपनी मर्दानगी का नंगा प्रदर्शन कर चुकी है।
अब तक प्राप्त सूचना के आधार पर अभी शाम तक प्रदर्शनकारी लघु सचिवालय पर डटे हुए थे वहीँ प्रशासन ने भारी मात्रा में पुलिस बल तैनात किया ..प्रदर्शनकारियों में प्रो विमल थोरात भी शामिल है।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि हरियाणा सरकार सारी हदे लांघकर दलित और महिला आंदोलन को कुचलने पर अमादा है और उसने सभी पुलिस थानों को साफ़ निर्देश दिए है कि अब वे किसी भी कीमत पर दलितों की कोई भी एफआईआर दर्ज नहीं करे (क्योंकि इससे प्रदेश की छवि खराब होती है!)


