दलितों को देने के लिये योगी के पास सिवाय मुसलमानों से नफरत के कुछ भी नहीं
दलितों को देने के लिये योगी के पास सिवाय मुसलमानों से नफरत के कुछ भी नहीं
दलितों को देने के लिये योगी के पास सिवाय मुसलमानों से नफरत के कुछ भी नहीं
नरेंद्र मोदी सरकार के 4.5 साल पूरे हो चुके हैं और पूरा देश इस समय चुनावी मूड में चला गया है।
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भी हर कदम पर चुनावी दांव खेलते हुए आगे बढ़ रही है। अभी वह धार्मिक ध्रुवीकरण का घिनौना खेल, खेल रही है।
अपनी चुनावी रणनीति में योगी आदित्यनाथ जहाँ प्रदेश के दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों के बीच हिंदुत्व के प्रचार-प्रसार में दिल्ली में अपनी वापसी देख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इसी समुदाय से सबसे ज्यादा असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों की हालत बहुत परेशान करती है।
असल में उत्तर प्रदेश में सीवर साफ करने वाला कामगार मूलतः प्रदेश के दलित समुदाय से आता है। यह समुदाय बड़ी संख्या में असंगठित क्षेत्र में कामगार है। सीवर सफाई इसी समुदाय के जिम्मे है।
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार जहाँ सबका साथ सबका विकास करने का दावा करते हुए ऊँची-ऊँची मूर्तियाँ बनवाने से लेकर शहरों के नाम बदलने में पूरी तरह जुटी हुई है, वहीं दूसरी इस समुदाय से आने वाले कामगारों से सम्बंधित कुछ ऐसी चौंकाने वाली जानकारियाँ सामने आई हैं जिससे प्रदेश के असंगठित तबके के मजदूरों की असल हालत बयाँ हो जाती है।
जन सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहत असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों में सीवर साफ करने वाले कर्मचारियों के बारे में इकट्ठा की गई जानकारी बहुत चौंकाने वाली है।
योगी सरकार से यह पूछा गया था कि वित्त वर्ष 2017-18 में सीवर सफाई के दौरान कितने मजदूरों की मृत्यु हुई और कितने मजदूरों को सरकार द्वारा मुआवजा दिया गया है?
पर बहुत चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। सरकार के आगरा, गोंडा, नोएडा, बरेली स्थित श्रम कार्यालयों ने एक सी जानकारी भेजी है।
सरकार द्वारा जो सूचना दी गई है उसके मुताबिक वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार के श्रम कार्यालयों में सीवर सफाई के दौरान मृत मजदूरों की कोई सूचना उपलब्ध नहीं है और ना ही इन कार्यालयों ने मृत मजदूरों को कोई मुआवजा ही दिया है।
यह बात साबित करती है कि योगी आदित्यनाथ की भाजपा सरकार को दलित समुदाय से आने वाले आम श्रमिक से कुछ भी लेना-देना नहीं है।
इनका सबका साथ सबका विकास का नारा एक झूठ है। फ़रेब है।
दरअसल यह दलित समुदाय के बीच हिंदुत्व के प्रचार-प्रसार के नाम पर सिर्फ और सिर्फ मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैला रहे है। इसी बहाने उनकी बेहतरी के सवाल झुठलाए जा रहे हैं।
आम दलितों को देने के लिये योगी के पास सिवाय मुसलमानों से नफरत के कुछ नहीं है, इसे समझना होगा।
क्या यह ख़बर/ लेख आपको पसंद आया ? कृपया कमेंट बॉक्स में कमेंट भी करें और शेयर भी करें ताकि ज्यादा लोगों तक बात पहुंचे
Yogi Adityanath, Uttar Pradesh, Yogi Sarkar, hatred of Muslims, religious polarization,


