दिल्ली, 9 सितम्बर। दिल्ली कॉलेज ऑफ आर्ट्स के छात्रों की हड़ताल आज 10वें दिन जारी है। अपनी माँगों को लेकर छात्र पिछले 10 दिनों से सघर्षरत है। आज दिशा छात्र संगठन ने सुप्रसिद्ध समकालीन कलाकार विवान सुंदरम को छात्रों से बातचीत करने और इस संघर्ष में उनका साथ देने के लिए आमंत्रित किया था।
छात्रों के बीच बात रखते हुए विवान सुंदरम ने कहा कि छात्रों को न केवल अपनी संसाधनों की कमी और भ्रष्ट प्रशासन के ख़िलाफ़ अपनी आवाज उठानी चाहिए मगर इसके साथ साथ उनके अपने कलात्मक हितों के लिए भी संघर्ष करना चाहिए।
साथ ही विवान सुंदरम ने कहा कि छात्रों को एक व्यापक हस्ताक्षर अभियान चलाकर न केवल छात्रों को बल्कि तमाम कलाकारों को भी अपने संघर्ष से जोड़ना चाहिए और दिल्ली सरकार तक भी अपनी माँगों को लेकर जाना चाहिए।
आज पुणे के एफ.टी.आई.आई के छात्रों किसलय, साक्षी ने भी दिल्ली कॉलेज ऑफ आर्ट्स के छात्रों का समर्थन करते हुए उनके साथ बात चीत की।
किसलय ने कहा कि छात्रों को अपनी जायज माँगों के लिए अपनी आवाज उठानी चाहिए।
दिल्ली विश्वविद्यालय अध्यापक संघ (डूटा) की अध्यक्ष नंदिता नारायण और डूटा की सदस्य शाश्वती मजूमदार ने भी आज छात्रों के समर्थन में बात रखते हुए कहा कि वे लोग एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दिल्ली विश्वविद्यालय, जामिया मिलिया जैसे विश्वविद्यालयों के कला विभाग से छात्रों से अपील करेंगी कि वो लोग भी दिल्ली कॉलेज ऑफ आर्ट्स के छात्रों के संघर्ष का समर्थन करे।
छात्रों के बीच बात रखते हुए दिशा छात्र संगठन के अभिनव ने कहा कि छात्रों को अपनी प्रशासनिक माँगों को लेकर केजरीवाल सरकार के पास जाना चाहिए और अपनी अकादमिक माँगों को लेकर दिल्ली विश्वविद्यालय के फाइन आर्ट्स डीन के पास जाना चाहिए।
आज कॉलेज के डायरेक्टर ने छात्रों के एक प्रतिनधिमंडल को बातचीत करने के लिए बुलवाया था मगर 2 घंटे से भी ऊपर चली इस बातचीत में प्रशासन ने छात्रों की किसी भी माँग को लेकर कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया और गोलमोल बातें करते हुए छात्रों को क्लासों में लौट जाने को कहा। डायरेक्टर ने कहा कि छात्र कल आकर अपनी माँगों का माँगपत्रक जमा कर दें और अपनी क्लासों में लौट जाए। जिसके बाद छात्रों की आम सभा में यह फैसला लिया गया कि कॉलेज प्रशासन द्वारा बिना किसी लिखित आश्वासन के छात्र क्लासों में नहीं लौटेंगे और अपना संघर्ष जारी रखेंगे।
यह जानकारी देते हुए एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि दिशा छात्र संगठन शुरुआत से ही दिल्ली कॉलेज ऑफ आर्ट्स के छात्रों की हड़ताल का समर्थन कर रहा है। छात्र अपने विरोध को अपनी कला के जरिये लोगों तक लेकर जा रहे हैं। पोस्टरों, स्केचेस के जरिये छात्र अपनी दिक्कतों और परेशानियों को सबके सामने रख रहे हैं। छात्रों की माँग हैं कि रिक्त पदों पर अध्यापकों की नियुक्ति की जाय, साथ ही कॉलेज के भीतर एक स्टेशनरी की दुकान खोली जाये जहाँ सस्ती दरों पर कला सम्बंध्ति सामग्री उपलब्ध कराई जाये, हर साल होने वाली कला प्रदर्शनी को फिर से शुरू किया जाये और छात्रों को जिन संसाध्नों की ज़रूरत अपने पाठ्यक्रमों के लिए पड़ती हैं वो पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराई जायें, कॉलेज लाइब्रेरी को शाम 6 बजे की बजाये 8 बजे तक खोला जाए और सप्ताह में 6 दिन लाइब्रेरी खुलनी चाहिए ताकि छात्र वहाँ बैठ कर पढ़ाई कर सकें, साथ ही कॉलेज को मिलने वाले फण्ड के खर्च में पारदर्शिता होनी चाहिए आदि। जब छात्रों ने अपनी यह सारी माँगें कॉलेज प्रशासन और प्रिंसिपल के सामने रखी तब प्रिंसिपल ने खुद को एक अस्थायी पदाधिकारी कहते हुए पल्ला झाड़ लिया। जिसके बाद से 300 से भी ज्यादा छात्र हड़ताल पर बैठे हैं।