दिल्‍ली में किराया नियंत्रण कानून लागू करवाने के लिए छात्रों ने घेरा केजरीवाल का घर
नई दिल्ली। दिल्‍ली में देश भर से हज़ारों छात्र-छात्राएं हर साल पढ़ने के लिए आते हैं। दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय के आसपास के इलाकों में फिलहाल एक लाख से ज्‍यादा छात्रों की रिहाइश है, जिनमें कई नियमित पाठ्यक्रमों में पंजीकृत हैं तो कई अन्‍य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय अधिनियम की धारा 33 में हर छात्र/छात्रा के अनिवार्य आवासन का प्रबंध करना विश्‍वविद्यालय की जिम्‍मेदारी बताया गया है, बावजूद इसके विश्‍वविद्यालय प्रशासन बरसों से इसके प्रति उदासीन रहा है। इसका परिणाम यह हुआ है कि निम्‍न मध्‍यवर्गीय परिवारों से यहां पढ़ाई करने के लिए आने वाले छात्र लोभी मकान-मालिकों/प्रॉपर्टी डीलरों के चंगुल में फंसकर बदहाल स्थितियों में जीने को विवश हैं। दिल्‍ली में कमरों के किराये के नियंत्रण के लिए 1995 में जो कानून लाया गया था, वह आज तक लागू नहीं हो पाया है। नतीजतन, हर साल लगातार बढ़ते किराये और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में लाखों छात्रों का सब्र अब जवाब दे गया है और वे आंदोलन पर उतर आए हैं।
इसी सिलसिले में आज सोमवार 1 जून, 2015 को आंदोलनरत छात्रों ने दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री के आवास का घेराव किया ताकि खुद को आम आदमी का रहनुमा बताने वाली इस सरकार का ध्‍यान इस व्‍यापक समस्‍या की ओर खींचा जा सके और कानून लागू करवाने के लिए दबाव कायम किया जा सके। प्रदर्शन के संयोजकों में से एक प्रवीण कुमार ने कहा कि दिल्ली रेंट कंट्रोल ऐक्ट 1958 में आया और फिर 1995 में उसमें संशोधन भी किया गया, लेकिन उस पर फिर कभी विचार नहीं किया गया... छात्रों में आक्रोश है और उनका कहना है कि दिल्ली सरकार ने भले ही बिजली पानी सस्ते कर दिए हों लेकिन छात्रों या अन्य किरायेदारों से अभी भी मकान मालिकों द्वारा पहले की तरह मनमाने तरीके से बिल वसूला जा रहा है.
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्रों ने बताया कि दिल्‍ली में किराया नियंत्रण कानून लागू करवाने के लिए अब तक 30,000 से ज्‍यादा छात्रों ने मांगपत्र पर दस्‍तखत कर दिए हैं और दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय के अध्‍यापक संघ (डूटा) ने भी 30 मई को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में छात्रों के इस आंदोलन का समर्थन किया और प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए डूटा अध्यक्षा नंदिता नारायण ने एक जून को कहा कि हम छात्रों की हर मांग का समर्थन करते हैं, साथ ही उन्होंने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय में पढने वाले हजारों गरीब छात्रों को रियायती दर पर भोजन, पानी और आवास की सुविधा उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है, विश्वविद्यालय के बाहर के छात्रों के लिए भी ऐसी सुविधाओं को उपलब्ध कराना सरकार की ही जिम्मेदारी है।