दिल्ली में भूख से मरी तीन बच्चियां हिन्दू थीं, लेकिन हिन्दू राष्ट्र में उनका प्रवेश नहीं था
दिल्ली में भूख से मरी तीन बच्चियां हिन्दू थीं, लेकिन हिन्दू राष्ट्र में उनका प्रवेश नहीं था
दिल्ली में भूख से मरी तीन बच्चियां हिन्दू थीं, लेकिन हिन्दू राष्ट्र में उनका प्रवेश नहीं था
दिल्ली के लिए शर्मनाक खबर — मंडावली में तीन बच्चियां मरी मिलीं . पोस्ट मार्टम में पता चला कि तीनो का पेट कई दिन से खाली था और वे भूख से मर गयीं . मरी बच्चियां हिन्दू थीं, लेकिन हिन्दू राष्ट्र में उनका प्रवेश नहीं था
असल में बच्चों का पिता बैटरी रिक्शा चलाता था, कुछ दिन पहले उसका रिक्शा चोरी हो गया, उसके बाद मकान मालिक ने उसके परिवार को घर से निकाल दिया। उस दिन भारी बरसात थी, ऐसे में एक परिचित उन्हें अपने घर ले गया। बच्चे या तो स्वाभिमानी थे या संकोची, उन्होंने किसी से अपनी भूख को उजागर नहीं किया और जान दे दी। बच्चों की मां मानसिक रूप से बीमार है, बाप का पता नहीं पड़ रहा, वह काम तलाशने कल से घर से निकला है।
बच्चियों की मौत संदिग्ध लगने पर मामले की सूचना पुलिस को दी गई थी। खबर मिलते ही मौके पर पहुंची। पुलिस ने आठ, चार और दो साल की तीनों बच्चियों के शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। पुलिस ने मंगलवार शाम को शवों का पोस्टमार्टम भी करा दिया है।
पूर्वी जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मुताबिक मूलरूप से पश्चिम बंगाल की रहने वाली शिखा, मानसी और पारुल परिवार के साथ मंडावली गांव स्थित इकबाल का गैराज मदरसे वाली गली में रहती थीं। तीन सगी बहनों की कुपोषण से मौत ने दिल्ली सरकार पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। खासबात ये है कि जिस इलाके से तीन बच्चियां आती हैं, वह इलाका दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के विधानसभा क्षेत्र में आता है। आप इसका दोष एल जी पर लगा रही है कि यदि घर पर राशन सप्लाई होती तो यह नहीं होता, लेकिन कोई यह जानना नहीं चाहता कि उस परिवार के पास राशन कार्ड भी था या नहीं।
(पंकज चतुर्वेदी वरिष्ठ पत्रकार हैं। उनकी यह टिप्पणी मूलतः एफबी पर प्रकाशित हुई है)


