दीदी के बाद मुकुल राय ने पूरी जिम्मेदारी लेकर कह दिया, जिसने भी पैसे लिये, अपने लिए नहीं लिये!
दीदी के बाद मुकुल राय ने पूरी जिम्मेदारी लेकर कह दिया, जिसने भी पैसे लिये, अपने लिए नहीं लिये!
फिर हाईकोर्ट ने वीडियो देखते ही मंतव्य किया, भयंकर!
आम वोटरों को फैसले के लिए और क्या सबूत चाहिए?
पूर्व रेल मंत्री मुकुल राय ने सीधे कह दियाः‘‘দায়িত্ব নিয়ে বলছি আমাদের কেউ নিজের স্বার্থে টাকা নেয়নি’’!
एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास
कोलकाता (हस्तक्षेप)। ব্যক্তিগত কাজের জন্য কেউ কোনও পয়সা নেয়নি। স্টিংকাণ্ডে চাঞ্চল্যকর মন্তব্য মুকুল রায়ের। কার্যত স্বীকার করলেন দলের স্বার্থে টাকা নেওয়ার কথা। খোঁচা বিরোধীদের।
बांग्ला महाभारत के मूसलपर्व का सीधा असर 21 अप्रैल को हो रहे तीसरे चरण के मतदान पर होने वाला है। हांलाकि भूतों के नाच का पूरा पुख्ता इंतजाम है और दिशा-दिशा में एक एक इंच जमीन के दखल के लिए हिंसा का सिलसिला जारी है लेकिन चुनाव का फैसला तो नारदा स्टिंग से हो जाने का अंदेशा है।
उत्तर कोलकाता में भी 21 को मुर्शिदाबाद, नदिया, वर्धमान जिले के साथ तीसरे चरण के लिए वोट पड़ने हैं। कुल 62 विधानसभा सीटों के लिए वोट पड़ने से पहले ही सत्तादल सही मायने में दो फाड़ है।
अब देख सुनकर लग रहा है कि विपक्ष की चाहे जो हालत हो या केंद्र सरकारी और लोकसभा एथिक्स कमेटी फैसला करें या नहीं करें, हाईकोर्ट का फैसला जल्द से जल्द हो या न हो, दीदी से लेकर तृणमूल का हर सिपाहसालार नारदा दंश से बचाव के लिए घूसखोरी को सही बताकर अपने को पाक-साफ बताने के फिराक में है।
अब लगता है कि किसी फारेंसिक जांच की भी जरूरत नहीं है और न वीडियो की प्रामाणिकता पर मुहर लगाने की नौबत आने वाली है। दीदी के बाद उनके खास सिपाहसालार मुकुल राय ने भी डंके की चोट पर कह दिया कि रिश्वत ली है।
गौरतलब है कि है कि स्टिंग ऑपरेशन में तृणमूल कांग्रेस के पांच लोकसभा सांसद सौगत राय, प्रसून मुखर्जी, सुल्तान अहमद, काकुली घोष दस्तीदार अपरूपा पोद्दार और राज्यसभा सांसद मुकुल राय सहित पार्टी के 12 नेता और मंत्री रिश्वत लेते देखे गए हैं। एथिक्स कमेटी ने इनमें से पार्टी के पांच लोकसभा सांसदों को नोटिस दिया है। जब उनसे पूछा गया कि मामले की जांच कर तृणमूल कांग्रेस के दोषी सांसदों को सजा देने के लिए क्या समय-सीमा निर्धारित की गई है। जवाब में उन्होंने कहा कि एथिक्स कमेटी के लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं होती। कमेटी जल्दबाजी में नहीं है।
उत्तर कोलकाता की सीटें तो पहले ही दांव पर थीं। बड़ा बाजार वैसे ही बंगाल में संघ परिवार का गढ़ है और बंगाल की राजनीति के लिए तमाम संसाधन वहीं से पैदा होते हैं और बाजार की ताकतें भी वहीं फैसला करती है कि किसकी सरकार बनाये या किसकी सरकार गिरा दें। उसी बड़ा बाजार में सत्तादल कटघरे में है।
गिरीश पार्क से हावड़ा को जोड़ने वाले अधबने फ्लाईओवर के धंस जाने से सिंडिकेट का जो मलबा बह निकला है, वह सूखती हुई गंगा की धार से भी ज्यादा तेज है तो कोलकाता और आसपास, पूरे बंगाल में 42 डिग्री सेल्सियस से लेकर 45 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर बह रही लू से भी भयंकर है।
जोड़ासांको में रवींद्र का पुशतैनी मकान है तो उसी जोड़ासांको सीट पर 21 को वोट पड़ने हैं जहां फ्लाईओवर निर्माण घोटाले के सिंडिकेट से तृणमूली सत्ता के नाभिनाल से एकदम शुरुआत से जो बख्शी परिवार का नाम नत्थी है, उसकी बहू स्मिता खड़ी हैं अपनी सीट बचाने के लिए और मुकाबले में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राहुल सिन्हा हैं।
कोलकाता दांव पर है और शहरी मतदाताओं में निर्णायक दीदी की ईमानदारी की छवि है जिसे नारदा स्टिंग ने मटमैला कर दिया है।
वहीं मध्य कोलकाता के चौरंगी में बंगाल की राजनीति के चाणक्य वाम समर्थित कांग्रेस के सिपाहसालार सोमेन मित्र मैदान में हैं, जिनके मुकाबले सासंद सुदीप बदोपाध्याय की अभिनेत्री पत्नी नयना बंदोपाध्याय हैं।
याद करने की जरूरत है कि शुरू से दीदी कोलकाता में बेहद लोकप्रिय रही हैं और कामरेड ज्योति बसु के जमाने में उनने कोलकाता फतह किया है और लोकसभा चुनाव भी वे लगातार 1984 से कोलकाता से जीतती रही हैं और कोलकाता के भवानीपुर में ही दीदी का विधानसभा केंद्र हैं।
जाहिर है कि बाकी बंगाल में कुछ भी हो जाये, दीदी कोलकाता हारने के लिए तैयार नहीं हैं।
लोकसभा की समिति और हाई कोर्ट का फैसला कभी भी आ सकता है और लाजिमी तौर पर कोलकाता और दीदी के गढ़ दक्षिण बंगाल में इसका असर भयंकर होने वाला है।
कल कोलकाता के सात विधानसभा इलाकों में वोट पड़ने हैं। काशीपुर-बेलगाछिया, बेलेघाटा, माणिकतला, श्यामपुकुर, एंटाली, जोड़ासांको और चौरंगी में भारी संख्य में मुसलमान वोटर हैं, उनकी नजर में भी दीदी का दमान पाक साफ नजर आना चाहिए।
कोलकाता में पहला वोट पड़ने से पहले चुनाव आयोग ने इस बीच दीदी को जोरदार झटका दे दिया है।
ममता बनर्जी के नाम शो काज का जवाब कैसे दे दिया है राज्य सरकार के मुख्यसचिव ने, कोलकाता के शहीद मीनार के अपने भाषण में दीदी के खिलाफ इसे बड़ा मुद्दा बना दिय़ा तो प्रधानमंत्री ने और अब चुनाव आयोग के सचिव आर के श्रीवास्तव ने मुख्य सचिव से जवाब तलब किया है कि उनने ममता की ओर से जवाब क्यों दिये हैं उन्हें कोलकाता में वोट की तारीख 21 अप्रैल के भीतर जवाब देना है। इसके साथ ही आयोग ने साफ कर दिया है कि दीदी को दिये गये नोटिस का जवाब उन्हें ही देना है।
जाहिर है कि इस संगीन हालात में दीदी के पास कोई दूसरा रास्ता ही खुला नहीं था कि नारदा स्टिंग के वीडियो में पकड़े गये लोगों से अपने को अलग खड़ा करें वरना वे भली भांति जानती हैं कि कोलकाता में सोमेन मित्र और राहुल सिन्हा अगर चुनाव जीत गये तो उनका ताश का महल भरभराकर गिरेगा।
कुणाल घोष और मदन मित्र के जेल में सड़ते रहने से शारदा मामला रफा दफा हो ही गया तो दीदी को अभी उम्मीद है कि दो चार दागी मंत्री सांसद वगैरह-वगैरह अगर फिर जेल में सड़ने के लिए चले भी जायें तो वे कोलकाता बचा लेंगी।
दीदी की इस रणनीति से हड़कंप ही नहीं मचा बाकायदा दीदी के घर से मूसलपर्व शुरु हो गया।
शारदा फर्जीवाड़े में क्लीन चिट पाने के बावजूद भारत के पूर्व रेलमंत्री और दीदी के खासमखास सिपाहसालार शारदा की आग मे अब भी झुलस रहे हैं। दीदी से अलगाव के बाद ऐन चुनाव से पहले उनकी घर वापसी हुई है।
अब पूर्व रेल मंत्री मुकुल राय ने सीधे कह दियाः ‘‘দায়িত্ব নিয়ে বলছি আমাদের কেউ নিজের স্বার্থে টাকা নেয়নি’’!
मतलब यह कि खास कोलकाता में दीदी ने नारदा स्टिंग में फंसे सांसदों, मंत्रियों, विधायकों और मेयरों की रिश्वतखोरी से अपने को अलग कर लिया तो स्टिंग में पैसे लेते हुए दीख रहे मुकुल राय ने मान लिया कि रिश्वत सभी ने ली है लेकिन रिश्वत का पैसा किसी ने अपने पास रखा नहीं है और न किसी ने अपने लिए रिश्त ली है।
जाहिर है कि अब रिश्वतखोरी हुई है, इसे अलग से साबित करने की जरूरत नहीं है क्योंकि मुकुल राय ने पूरी जिम्मेदारी लेते हुए यह इकबालिया बयान सीधे कुरुक्षेत्र के मैदान वर्धमान जिले के कालना के एक चुनाव सभा में जारी कर दिया है।
अब सवाल है तो रिश्वत किसी ने रखी नहीं है तो यह रकम किस खाते में जमा हो गयी और किसके हाथों में पहुंची।
पहले ही आरोप है कि शारदा के खजाने से गाड़ियों में भर-भर कर पैसे विधानसभा चुनाव से पहले मौकों पर रवाना कर दिये गये और हवा बनाने के लिए तृणमूल के समर्थन में मीडिया खड़ा करने में शारदा का दिवालिया निकल गया और इस सिलसिले में शारदा के मालिक जेल में बंद सुदीप्त सेन का इकबालिया बयान रिकार्ड है। मीडिया प्रमुख कुणाल घोष ने तो जेल डायरी में यही किस्सा बयान किया है और जब भी उन्हे जेल से अदालत ले जाया जाता है वे खुलेआम चीख-चीखकर नाम लेकर कहते हैं कि शारदा का पैसा दबाने वाले छुट्टा घूम रहे हैं।
अब मुकुल राय की आवाज में न सिर्फ फंसे हुए मंत्रियों, सांसदों और मेयरों की आवाजें है, बल्कि उसी में कुणाल घोष और सुदीप्तो सेन की आपबीती की गूंज भी है।


