मसीहुद्दीन संजरी

पहले, दूसरे चरण तक विकास, किसानों की कर्ज माफी और नीचे से राम मंदिर, लव जिहाद लेकिन जादू नहीं चला।

तीसरे चरण के खत्म होते होते रमज़ान, दीपावली की बिजली और कब्रस्तान, श्मशान यह भी नहीं चला।

पांचवें चरण तक पहुंचते पहुंचते मोदी पर हमला और राकेट लांचर आ गया। टीवी चिल्लाने लगा कि मऊ तो आज़मगढ़ का हिस्सा रहा है, नेपाल से करीब भी है, मतलब आतंकवादी मोदी को मारना चाहते थे।

यही काम सेवक ने गुजरात में भी किया था कि इशरत जहां मोदी को मारना चाहती थी। लेकिन सेवक जी यह उत्तर प्रदेश का पूर्वांचल है बिहार से सटा हुआ।

बिहार तो याद है ना। यहां आतंकवाद का सच लोगों को पता है।

जनता को डरवा कर वोट लेने का समय गया। अब हिम्मत है तो पौने तीन साल का रिपोर्ट कार्ड पेश कीजिए। आपको अंदाज़ा नहीं है कि दूसरी पार्टियों और नेताओं का मज़ाक बनाते बनाते और खुद हंसी के पात्र बन चुके हैं।