देख फकीरे लोकतंत्र का फूहड़ नंगा नाच
देख फकीरे लोकतंत्र का फूहड़ नंगा नाच
लोकतंत्र का फूहड़ नंगा नाच- साम्प्रदायिक फासीवाद विरोधी जन-एकजुटता अभियान के तहत लखनऊ विश्वविद्यालय, कलक्ट्रेट और हज़रतगंज में सभाएं और नुक्कड़ नाटक
लखनऊ, 25 फरवरी। विभिन्न जनसंगठनों की ओर से चलाये जा रहे जन-एकजुटता अभियान के तहत बुधवार को लखनऊ विश्वविद्यालय, कलक्ट्रेट और हज़रतगंज में सभाओं और नुक्कड़ नाटकों के जरिए साम्प्रदायिक बँटवारे की राजनीति का पर्दाफाश किया गया और एक नया क्रांतिकारी विकल्प खड़ा करने का आह्वान किया गया।
नौजवान भारत सभा, स्त्री मुक्ति लीग और जागरूक नागरिक मंच की ओर से चलाये जा रहे अभियान के तहत कार्यकर्ताओं की टोली ने सुबह से लेकर शाम तक निरालानगर, विश्वविद्यालय, लालबाग, कैसरबाग, हाईकोर्ट, कलक्ट्रेट, परिवर्तन चौक, हज़रतगंज आदि में साइकिल यात्रा तथा नुक्कड़ सभाएं करते हुए बड़े पैमाने पर पर्चा वितरण किया।
विभिन्न सभाओं में वक्ताओं ने कहा कि जैसे-जैसे मोदी सरकार के चुनावी वायदों की पोल खुलती जा रही है, जनता को धर्म के नाम पर बाँटने की कोशिशें की जा रही हैं। एक तरफ महँगाई, बेरोज़गारी और भ्रष्टाचार बढ़ता जा रहा है और दूसरी ओर इनसे ध्यान भटकाने के लिए कभी लव जिहाद, तो कभी 'घर वापसी’ और ‘हिन्दू राष्ट्र’ जैसे नारे उछाले जा रहे हैं। भारतीय संस्कृति और हिन्दुत्व की तमाम बातों के बावजूद भाजपा और संघ परिवार का असली एजेंडा देशी-विदेशी पूंजीपति घरानों की सेवा करना है और उन्हीं के हक में मज़दूरों के अधिकारों में कटौती से लेकर जबरन भूमि अधिग्रहण आसान बनाने जैसे कदम उठाये जा रहे हैं। कार्यकर्ताओं ने हर प्रकार के धार्मिक-मज़हबी कट्टरपन्थियों को नकारने और अशफ़ाक-बिस्मिल की साझी विरासत से प्रेरणा लेकर अवामी एकजुटता कायम करने का आह्वान किया। उन्होंने साम्प्रदायिक जुनून भड़काने वाली शक्तियों पर कठोर कार्रवाई करने केन्द्र सरकार तथा तमाम राज्य सरकारों द्वारा धर्म को राजनीति और सामाजिक जीवन से अलग करने के लिए सख़्त कानून बनाने की मांग भी उठाई!
इस दौरान प्रस्तुत नाटक 'देख फकीरे लोकतंत्र का फूहड़ नंगा नाच' में संसद और विधानसभाओं में सरकार और विपक्ष के बीच चलने वाली नूरांकुश्ती और कारपोरेट हितों के लिए जनता के मुद्दों की बलि चढ़ाने पर तीखे कटाक्ष किये गये। नाटक में उद्योगपतियों के हित में जबरन भूमि अधिग्रहण, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और मज़दूरों के शोषण तथा सभी पार्टियों के बीच ऐसे सवालों पर आम सहमति का भी बेहद दिलचस्प और तीखेपन के साथ भंडाफोड़ किया गया।
अभियान टोली में नौजवान भारत सभा की ओर से गीतिका, जागरूक नागरिक मंच की ओर से सत्यम, स्त्री मुक्ति लीग की ओर से निशू और शहीद भगतसिंह विचार मंच, इलाहाबाद की ओर से प्रसेन ने प्रमुख रूप से विचार व्यक्त किये।
इस अभियान के तहत चन्द्रशेखर आज़ाद के शहादत दिवस 27 फरवरी को खदरा में जनसभा और सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ तीन दिवसीय मुहिम का समापन किया जाएगा।


