वायु प्रदूषण के संघर्ष में दिल्ली अकेला शहर नहीं
ग्रीनपीस ने एनएक्यूआई के आंकड़े का विश्लेषण करके बताया
नई दिल्ली, 15 दिसबंर, 2015। ग्रीनपीस इंडिया ने देश के 17 शहरों के राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचनांक (एनएक्यूआई) से पाए आँकड़ों का विश्लेषण प्रकाशित किया है, जिससे स्पष्ट होता है कि दिल्ली के अलावा केन्द्र और कई अन्य राज्य सरकारों को भी अपने शहरों में वायु प्रदूषण के रोकथाम पर तुरंत क़दम उठाने होंगे। जिन 17 शहरों में प्रदूषण के आँकड़े उपलब्ध हैं, उनमें से 15 शहरों में प्रदूषण का स्तर हकीकत से कहीं ज्यादा खतरनाक है। सच तो यह है कि अप्रैल से नवबंर के बीच वायु प्रदूषण के जो आंकड़े एकत्रित किए गए थे वे मानक स्तर से 50 फीसदी अधिक है जिससे वायु प्रदूषण आपदा का संकेत मिलता है।
ग्रीनपीस के कैंपेनर सुनील दहिया का कहना है, “देश की राजधानी होने की वजह से, या फिर सबसे अधिक प्रदूषण के स्तर दिखलाने के कारण, दिल्ली के वायु प्रदूषण पर ख़ूब चर्चा हो रही है, और उसे सबसे ज्यादा तवज्जो मिलता है। लेकिन इस संदिग्ध सतह को ज़रा भी खरोंचा जाए तो आपको कई अन्य शहरों में पीएम 2.5 की सांद्रता दिखेगी - नमूने के तौर पर लखनऊ, अहमदाबाद, मुजफ्फरपुर और फरीदाबाद जैसे शहरों में तो रेड एलर्ट जारी करना पड़ता। एनएक्यूआई के अपर्याप्त आँकड़े भी यह स्पष्ट दिखलाते हैं कि 32 स्टेशनों में से 23 स्टेशनों पर घोषित राष्ट्रीय मानकों से 70 फीसदी अधिक प्रदूषण पाया जा रहा है।”
सुनील दहिया के अनुसार देश के कुछ शहरों में प्रदूषण का स्तर बीजिंग और चीन के अन्य कई शहरों से काफी ज्यादा है और यह विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के मानक से दस गुणा अधिक है जो इस बात की तरफ इशारा करता है कि वायु प्रदूषण के मामले में यह सचमुच राष्ट्रीय आपदा की स्थिति है।
वायु प्रदूषण पर एनएक्यूआई के आकड़ों का पहली बार विश्लेषण करने के बारे में सुनील दहिया बताते हैं, “एनएक्यूआई मौजूदा हालात में समस्या को पहचानने में पूरी तरह असफल है। इतने बड़े देश में सिर्फ 17 शहरों के आंकड़े उपलब्ध हैं जो चौंकाने वाली बात है। तात्कालिक रूप से देश के अन्य कई शहरों के आंकड़ों को इसमें शामिल करने की जरूरत है। मौजूदा प्रणाली में इसमें अल्पकालीन और दीर्धकालीन परामर्श और समाधान भी शामिल किए जाने चाहिए।”
भारत का एनएक्यूआई प्रणाली वास्तविक आंकड़ों का आकलन करने में युरोपीय युनियन, अमरीका और चीन की तुलना में काफी पीछे है। समान्यतया युरोप के देशों में, हर शहर में चार वायु गुणवत्ता मापक केंद्र है, जबकि अमरीकी शहरों में पाँच, और चीन के शहरों में आठ केंद्र वास्तविक प्रदूषण दिखाने की सुविधा रखते हैं।लेकिन भारत के दस सबसे बड़े शहरों में एक भी मोनिटरिंग स्टेशन नहीं है।
ग्रीनपीस ने एक स्पष्ट और समयबद्ध क्लीन एयर ऐक्शन प्लान या कार्य योजना की मांग की है जिसमें सुनिश्चित लक्ष्य और समय सीमा निर्धारित हो व सबके स्वास्थ्य की प्रत्यक्ष जवाबदेही हो। इस दिशा में भारत विद्युत उत्पादन, उद्योग, परिवहन और कृषि योयोजनाओं व नीतियों के साथ धीमी गति से जलती इस आपदा को हल करने की दिशा में बड़े कदम उठा सकता है। सुनील दहिया का कहना है, “यह आपदा भारत की आपातकालीन कार्य के ‘क्लीन एयर नेशन’ योजना को परीक्षण करने का एक सुनहरा अवसर है।”