दोनों नवाज़ #बंदानवाज़ और #नवाज़शरीफ़ एक-दूसरे के आड़े वक़्त में काम आएं 😆

मोहन श्रोत्रिय
दोनों नवाज़
यानि #बंदानवाज़ और #नवाज़शरीफ़ दोस्त हैं, एक-दूसरे के गहरे दोस्त हैं। गहरे दोस्त माने जो एक-दूसरे के आड़े वक़्त में काम आएं।

दोनों का वक़्त आड़ा ही चल रहा है। एक जगह सिर्फ़ भक्त ख़ुश हैं, और दूसरी जगह आतंकी भी हड़का रहे हैं। आम जनता दोनों के लिए कोई मायने नहीं रखती। दोनों अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए तनाव चाहते हैं! सरहदों पर तनाव! आम जनता तनाव नहीं चाहती। सरहदों पर जब भी तनाव बढ़ता है, जीना मुहाल हो जाता है, आम लोगों का!
जनता ही युद्ध को रोक सकती है, अगर वह उन्माद फैलाने वालों की साज़िशों को नाकाम करने की समझ को साकार रूप देने का मन बना ले, तो अवश्य ही। अगर वह महंगाई, बढ़ती बेरोजगारी, गुजरात, यूपी, पंजाब, गोगुंडई, कॉर्पोरेट-प्रेम आदि सबको एक #फ़्रेम में रखकर जन-विरोधी षड्यंत्रों के सूत्रधारों को पहचानने में भूल न करे तो!

हम बुरे दौर से गुज़र रहे हैं, और ऐसे में एक-जैसे कष्ट झेलने वालों की व्यापक एकता बहुत ज़रूरी बन जाती है।
ऐसा न होने पर, हमें इतिहास से किसी माफ़ी की उम्मीद नहीं करनी चाहिए!
#सच जूतों के #फ़ीते बांधता ही रह जाता है, और इतनी ही देर में #झूठ दुनिया के तीन चक्कर काटकर आ जाता है!
देखा झूठ का कमाल?
#जलवा_झूठ_का!

मीडिया कभी किसी से इतना डरा है क्या, जितना #सम्राट और #तड़ीपार से?
(मोहन श्रोत्रिय की फेसबुक टिप्पणियों का समुच्चय)