लखनऊ, 20 दिसंबर। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने यूपी विधानसभा में महाराष्ट्र के मकोका की तर्ज पर माफिया और संगठित अपराध से निपटने के लिए कड़े प्रावधान वाला विधेयक यूपीकोका पेश किए जाने पर तंज कसा है।

श्री यादव ने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर ट्वीट कर राज्य सरकार के इस विधेयक पर मजाकिया लहजे में सवाल उठाए हैं।

अखिलेश ने कहा,

'नए साल में जनता को उत्तर प्रदेश सरकार का तोहफा, सेल्फी लेने पर लग सकता है यूपीकोका।'

एक अन्य ट्वीट में यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा,

'यूपीकोका नहीं ये धोखा है। फर्नीचर साफ करने के पाउडर को PETN विस्फोटक बताने वाले जनता को बहकाने में माहिर हैं। 9 महीनों में बीजेपी ने जन सुरक्षा से खिलवाड़ करते हुए न सिर्फ समाजवादी 'यूपी100' और महिला सुरक्षा की '1090 हेल्पलाइन' को बल्कि समाजवादी विकास पथ पर बढ़ते प्रदेश को रोका है।'

बता दें कि बुधवार को राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश विधानसभा में महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) की तर्ज पर माफिया और संगठित अपराध से निपटने के कड़े प्रावधान वाला एक विधेयक पेश किया। यह विधेयक आतंक फैलाने या बलपूर्वक या हिंसा द्वारा सरकार को उखाड़ फेंकने का प्रयास करने वालों से सख्ती से निपटने की व्यवस्था देता है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सदन में उत्तर प्रदेश संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक (यूपीकोका 2017) पेश किया। 2007 में जब मायावती मुख्यमंत्री बनी थीं तब इस विधेयक को वही लाई थीं, लेकिन विधान परिषद् में बसपा का बहुमत न होने के कारण यह विधेयक लटक गया था और समाजवादी पार्टी के कड़े विरोध के कारण इस विधेयक को तत्कालीन मायावती सरकार ने वापिस ले लिया था। हालांकि इसके पारित होने में अभी भी संदेह है क्योंकि विधान परिषद् में भाजपा बहुमत से बहुत दूर है और अब सपा व बसपा दोनों ही इसका विरोध कर रही हैं।

उधर रिहाई मंच ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर हमला बोलते हुए कहा है कि जिस सरकार के मुखिया के ऊपर दर्जनों आपराधिक मुकदमें दर्ज हों उनको कानून व्यवस्था पर बात करने का नैतिक हक नही, यूपीकोका तो दूर की बात है।