डॉ. विनय भारत
मोदीजी, आज नाम गोपनीय रखने के शर्त पे मेरे एक मुसलमान छात्र ने ये उद्गार व्यक्त किये हैं । रमजान के अवसर पर। पर उसने ये पत्र भारत के प्रधानमंत्री को लिखा है। मोदीजी को नहीं।
मैं उस छात्र के जानिब से ये खत आप तक पहुँचाने को अपने शिक्षक होने का दायित्व भर पूरा कर रहा हूँ। क्यूंकि मैंने उसे बेबाक होना सिखाया है। अगर मैं ये पोस्ट नहीं करूँगा तो उसके आँखों में नज़र डाल कर बात नहीं कर पाऊँगा। क्योंकि उस छात्र की मुझ पर श्रद्धा है।
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श्रीमान प्रधानमन्त्री जी,
भारत सरकार,
आप प्रधानमंत्री हैं। देश के प्रधान सेवक हैं। मुखिया हैं। आपको follow करने वाले भी करोड़ों में हैं। आदर्श हैं। और आप बीजेपी के नेता नहीं हैं। दोहरा दूँ। आप प्रधानमंत्री हैं हिंदुस्तान के।
इस बार को मिलाकर आपने तीसरी बार राष्ट्रपति भवन के इफ़्तार पार्टी का न्योता नहीं स्वीकार किया। और आपके followers तारीफ कर रहे हैं आपकी इस बचकानी हरकत की। इस देश की फैब्रिक क्या है ? उसे उन लोगों को इल्म होना चाहिए। आप पद पर हैं तो आपको सामाजिक दायित्व को निभाना होगा। जिस दिन से आपने प्रधानमंत्री के neutral पद की शपथ ग्रहण की " मैं,.... भारत की.... सामाजिक,... सांस्कृतिक मर्यादा को अक्षुण्ण रखूँगा " आप अपनी निजी जिंदगी के choice को खो देते हैं और एक बड़े सामूहिक जिम्मेदारी के लिए तैयार होते हैं।
अगर आपके भक्त गण जो बीजेपी के बैनर तले राजनीति कर रहे हैं, अगर वो सब भी आपको follow करने लगें तो क्या होगा ? अगर CM , राजभवन के न्योते को त्यागने लगे तो क्या होगा ? मेरा मोदीभक्त बच्चा आपको FOLLOW करके अपने मोहल्ले में सेवइयां खाना छोड़ दे तो किस तरीके का भारत तैयार होगा, कभी सोचा है आपने ? आप icon हैं। आप पर सामाजिक जिम्मेदारियां भी हैं ।
आपने जब बंगाल चुनावी सभा को संबोधित करते हुए अजान के वक्त अपने भाषण को रोक दिया था तो अहसास हुआ था कि आपके दिल में मस्जिदों के प्रति भी आस्था है। पर जब आप लगातार तीसरी बार इफ्तार में नहीं गए, तो हम सोचने पर मज़बूर हो रहे हैं कि कहीं आपने भाषण अजान से उठती हुई आवाज़ से पैदा हो रही "खलल" के वजह से तो नहीं रोक दिया था !!
नवाज साहब से दोस्ती exchange करने में आपको कोई एतराज़ नहीं, UAE से business deal में एतराज़ नहीं, फिर अपने ही देश के इफ्तारी से क्यों ?
क्या रामनवमी में हम आपका चना गुड़ नहीं खाते ! क्या हम दीवाली नहीं मनाते? क्या भारत के मुसलमान होली साथ नहीं खेलते ? क्या खुसरो ने कृष्ण भक्ति गीत नहीं लिखे। क्या रसखान पीछे हैं ?
बहुत सारे भक्त आपके इस कदम को कट्टर हिंदूवादी विचारधारा से सोच कर देख रहा है।
अगर चीजों को और narrow कर दिया जाए, (क्योंकि आप narrow करके देखने को बाध्य कर रहे हैं) तो सोचिये क़ि हमारे राष्ट्रपति जो हिन्दू ही नहीं , हिन्दू धर्म की अगुआई और पथ प्रदर्शक ब्राह्मण जाति से हैं , अगर वो भी संवैधानिक पद पर रहते हुए आपकी तरह सोचने लगे, और भारत की दरवाजे धर्म समभाव की परंपरा को तोड़ते हुए इफ़्तार आयोजन करना बंद कर दे तो ये किस तरीके के अविश्वास और भय से भरे हिंदुस्तान की ईबारत लिखेगा, क्या आपको इल्म है ?
PM साहब , ये मत भूलिए कि भारतीय संघीय व्यस्था में parliament के 3 अहम् हिस्से हैं : 1 लोकसभा 2 राज्यसभा 3 राष्ट्रपति। अगर राष्ट्रपति है , तो आप हैं।
और सबसे ऊपर , मोदीजी आप हम सबके आदर्श हैं। विपक्षियों के भी आदर्श हैं। विदेशों में आपके भाषणों में सृजित किया गया गांधी का हिंदुस्तान आपसे बहुत उम्मीदें रखता है। आप उसे बनाये रखें। यही प्रार्थना है।
( Letter as dictated to : Vinay Bharat )