अनपरा डीपरियोजना में बीएचईएल की खामियों के चलते यदि निगम के निर्दोष अभियन्ताओं पर हुई कार्यवाही, तो होगा पुरजोर विरोध

लखनऊ। अनपरा ‘डी’ परियोजना कार्यदायी संस्था बीएचईएल की कमियों के कारण बन्द पड़ी इकाई के मामले में बीएचईएल एवं उत्पादन निगम प्रबन्धन के कतिपय उच्चाधिकारियों को बचाने के लिए इसकी क्षतिपूर्ति उत्पादन निगम के निर्दोष अधिकारियों पर डालने की चल रही कोशिशों पर कड़ा एतराज जताते हुए विद्युत अभियन्ताओं ने चेतावनी दी है कि बड़ी मछलियों को बचाने के लिए यदि निर्दोष अभियन्ताओं को बलि का बकरा बनाया गया तो इसका तीव्र विरोध किया जायेगा एवं अभियन्ताओं को पूर्ण न्याय प्रदान किया जायेगा।

विद्युत अभियन्ता संघ के अध्यक्ष इं0 जी0के0 मिश्रा एवं महासचिव इं0 राजीव सिंह ने आज यहां जारी बयान में बताया कि 2,500 मे0वा0 अनपरा ‘डी’ परियोजना के निर्माण की कार्यदायी संस्था बीएचईएल, जिसको 2011 में परियोजना को पूर्ण कर उत्पादन पर लाना था, उत्पादन निगम प्रबन्धन एवं बीएचईएल की लचर कार्य प्रणाली के चलते इसकी पहली इकाई मार्च 2015 में सिंक्रोनाइज की गयी तथा बहुत सारे कार्य अभी भी अपूर्ण हैं जिस कारण परियोजना का बीएचईएल द्वारा हस्तान्तरण निगम को नहीं हुआ है। बीएचईएल द्वारा बिना काम पूरा किये हुए मशीन को अभी भी लगातार चलाने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि परियोजना पर स्थित निगम अभियन्ता समय-समय पर निगम के उच्च प्रबन्धन एवं बीएचईएल को मौखिक रूप से एवं पत्र के माध्यम से इकाई के अपूर्ण कार्यों के सम्बन्ध में अवगत कराते रहे हैं। पूर्व में भी बीएचईएल द्वारा अपूर्ण कार्य होने के बावजूद भी इकाई संख्या 06 को फुल लोड पर ले जाया गया जिससे उक्त इकाई का बाॅयलर क्षतिग्रस्त हुआ। पूर्व प्रकरण में हुए नुकसान से सबक न लेते हुए इसी प्रकार पुनः इकाई सं0 07 को भी बीएचईएल द्वारा मनमाने ढंग से बिना कार्य को पूर्ण किये हुए, को चलाया गया जिसके फलस्वरूप अपूर्ण कार्य के चलते टरबाइन रोटर क्षतिग्रस्त हो गया।

बीएचईएल एवं निगम प्रबन्धन द्वारा यह पूर्ण रूप से जानते हुए कि इकाई में अभी इतने कार्य बाकी हैं कि इसे चलाया जाना सुरक्षित नहीं है परन्तु बीएचईएल एवं निगम प्रबन्धन द्वारा उ0प्र0 सरकार एवं प्रमुख सचिव (ऊर्जा) को वस्तुस्थिति से अवगत न कराकर मात्र अपने से उच्चाधिकारियों की गुड बुक्स में बने रहने के कारण इसे चालू करा दिया गया जिसकी परिणति सबके सामने है। जबकि निम्न स्तर के अधिकारियों द्वारा लगातार कमियों की ओर ध्यानाकषर्ण किया जाता रहा है।

उन्होनें बताया कि विगत वर्ष इस कार्य के दौरान, बिना व्यक्ति एवं कार्य की आवश्यकता एवं महत्ता को ध्यान में रखते हुए एक तरफ से स्थानान्तरण नीति के नाम पर अधिकतर अभियन्ताओं का स्थानान्तरण कर दिया गया जिससे अफरा-तफरी का माहौल रहा। ऐसी शंका है कि बीएचईएल तथा उत्पादन निगम प्रबन्धन में बैठे लोगों द्वारा अपनी कमियों को छुपाने के लिए उत्पादन निगम के अभियन्ताओं का स्थानान्तरण किये जाने का दबाव डाला हो।

उन्होनें बताया कि अनेक महत्वपूर्ण कार्यों के शेष रह जाने के कारण ही इकाईयों को अभी बीएचईएल से ‘टेकओवर’ नहीं किया गया है। अतः इसके परिचालन एवं होने वाली क्षतियों के लिए पूर्ण रूप से बीएचईएल ही जिम्मेदार है। अतः बीएचईएल के अधिकारियों पर पूर्ण रूप से इसका दोष बनता है एवं उनपर कार्यवाही होनी चाहिए।