नई दिल्ली। केन्द्र व राज्य सरकारों की कारपोरेट परस्त निजीकरण की नीतियों के विरोध में आम आदमी पार्टी के प्रमुख नेताओं मनीष सिसौदिया और संजय सिंह को कई प्रमुख संघों ने ज्ञापन देकर संसद में ऐसे जन-विरोधी बिलों के विरोध हेतु आग्रह किया है। मनीष सिसौदिया और संजय सिंह ने अंधे निजीकरण का संसद में आम आदमी पार्टी की ओर से विरोध करने का आश्वासन दिया।
आल इण्डिया पावर इन्जीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे, विद्युत अभियंता संघ के महासचिव डी सी दीक्षित, संचार निगम के अजय त्रिवेदी, एच ए एल के सिद्धेश दुबे, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष रामराज दुबे, राज्य कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष कमलेश मिश्र, प्राथमिक शिक्षक संघ के सर्वेश शुक्ल, आवास विकास के अजय तिवारी व अन्य संगठनों के प्रतिनिधियों ने शनिवार रात ‘आप’ के नेताओं से मिलकर निजीकरण के विरोध में संसद में आवाज उठाने की अपील की।
शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि विद्युत (संशोधन) बिल 2014 विगत 19 दिसम्बर को लोक सभा में रख दिया गया है, जिसे केन्द्र सरकार संसद के बजट सत्र में पारित कराना चाहती है। इस संशोधन के पारित हो जाने पर देश की बिजली आपूर्ति चंद निजी घरानों के हाथ चली जायेगी जिससे बिजली की दरें बढ़ेगी और समाज के कमजोर तबके और किसानों को इसका सबसे अधिक खामियाजा उठाना पड़ेगा। कर्मचारी प्रतिनिधियों ने कहा कि विद्युत (संशोधन) बिल 2014 जन विरोधी है अतः इसे पारित नहीं होने देना चाहिये।
कर्मचारी प्रतिनिधियों ने कोयला खदानों को निजी घरानों को सौपने, एफ डी आई के नाम पर रेलवे के निजीकरण, बैंक, बीमा व संचार निगम का विनिवेश किये जाने का जोरदार विरोध करने की मांग की।
शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि संसद के बजट सत्र के पहले सभी राजनीतिक दलों के प्रमुख नेताओं से मिलकर निजीकरण की नीतियों के विरोध की अपील की जायेगी।