कैग रिपोर्ट के खुलासे के बाद करार रद्द करने की माँग
लखनऊ। निजी घरानों के साथ बिजली क्रय करार व आगरा में निजी घराने को सस्ती बिजली देने के करार के चलते पॉवर कॉरपोरेशन को 25 हजार करोड़ रूपए की क्षति होने की सीएजी रिपोर्ट विधानसभा में रखे जाने के बाद बिजली अभियन्ताओं ने इसे बहुत गम्भीर मामला बताते हुये प्रदेश के मुख्यमंत्री से माँग की है कि चारों करार तुरन्त निरस्त किये जायें जिससे आने वाले सालों में होने वाली और अधिक क्षति से बचा जा सके। अभियन्ताओं ने कहा कि सीएजी रिपोर्ट के खुलासे ने निजी घरानों को बेजा मुनाफा देने के उनके आरोपो की पुष्टि कर दी है। ऐसे में सरकार को करार रद्द कर पारदर्शिता का परिचय देना चाहिये।
ऑल इण्डिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे, विद्युत अभियन्ता संघ के अध्यक्ष आर के सिंह व महासचिव डी सी दीक्षित ने आज यहाँ जारी बयान में कहा कि निजीकरण की गलत ऊर्जा नीति के चलते हो रहे घोटालों और लूट का सीएजी द्वारा पर्दाफाश किये जाने के बाद अब जरूरी हो गया है कि ऊर्जा नीति में तत्काल बदलाव किया जाये अन्यथा प्रदेश को आने वाले वर्षो में अभूतपूर्व बिजली संकट का सामना करना पड़ेगा।
श्री दुबे ने बताया कि सीएजी रिपोर्ट के अनुसार गलत करार के चलते पॉवर कॉरपोरेशन को रोजा से बिजली खरीदने 3685 करोड़ रूपए, बजाज से बिजली खरीदने 5186 करोड़ रूपए जेपी से बारा में बिजली खरीदने में 10832 करोड़ रूपए और आगरा में टोरेन्ट को बिजली बेचने में 5022 करोड़ रूपए की क्षति होगी। सीएजी ने यह भी इंगित किया है कि करार इस तरह किये गये जिससे निजी घरानों को बेजा मुनाफा मिल सके जिसके कारण पॉवर कॉरपोरेशन को क्षति उठानी पड़ रही है। रोजा व बजाज के मामले में सीएजी रिपोर्ट अभी विधानसभा में रखी गयी है जबकि बारा व आगरा के बारे में रिपोर्ट गये साल विधानसभा में रखी गयी थी।
नेता त्रय ने बताया कि रोजा से बिजली खरीद करार में पूँजी लागत पर सीमाकंन न होने के प्राविधान के चलते कॉरपोरेशन को मार्च 13 तक 137 करोड़ की क्षति हो चुकी है और अगले 22 वर्षों में 1198 करोड़ रूपए की और क्षति होगी। इसी प्रकार निजी कम्पनियों को बहुवर्षीय टैरिफ में अधिक रख-रखाव खर्च के प्राविधान के कारण मार्च 13 तक 105 करोड़ की क्षति हो चुकी है और अगले 22 वर्ष में 1244 करोड़ रूपए की और क्षति होगी। टेरिफ बिनियम 2004 की अनदेखी कर कम्पनी को पूँजी पर अधिक प्रतिलाभ (आर ओ आई) दिये जाने से मार्च 2013 तक 41 करोड़ रूपए की क्षति हो चुकी है जो शेष 22 वर्ष में 581 करोड़ रूपए की और होगी। निर्धारित समय में परियोजना पूर्ण करने के नाम पर दिये जाने वाले इन्सेटिंव में गलत गणना के चलते मार्च 13 तक 13 करोड़ रूपए की क्षति हो चुकी है जो अगले 22 वर्ष 103 करोड रू. और होगी। इसी प्रकार डीम्ड जनरेशन के नाम पर 32 करोड़ रूपए, भुगतान में चूक के कारण 51 करोड़ रूपए, बिना सत्यापन बिजली खरीद के बिलो के भुगतान के मद में 124 करोड़ रूपए और विदेशी मुद्रा के लेन-देन के गलत दावे में 56 करोड़ रूपए क्षति पॉवर कॉरपोरेशन उठा चुका है।
विद्युत कर्मचारी नेताओं ने बताया कि बजाज एनर्जी के साथ बिजली खरीद के करार में सकल स्टेशन हीट रेट, संचालन एव रख-रखाव, आक्जिलरी उपभोग के मापदण्ड सही ढंग से निर्धारित न किये जाने के कारण विद्युत क्रय मूल्य का उच्च दर पर निर्धारण हुआ जिससे मार्च 13 तक 115 करोड़ रूपए की क्षति हो चुकी है जो शेष 24 वर्षो में 2764 करोड़ रूपए की और होगी। ऊर्जा क्रय नीति 2009 के प्राविधानों के तहत ऐसे बिजलीघरों से 50 प्रतिशत बिजली ही खरीदनी चाहिये थी किन्तु शत प्रतिशत बिजली खरीद के करार के कारण 1440 करोड़ रूपए की क्षति हो रही है। निजी कम्पनी द्वारा प्रोजेक्ट की लागत पर ऋण व अंश पूँजी की गलत गणना के चलते मार्च 13 तक 11 करोड़ की क्षति हो चुकी है। जो शेष 24 वर्षो की और होगी। इसी प्रकार समता पर प्रतिलाभ (आर ओ आई) के मद में मार्च 13 तक 14 करोड़ रूपए की क्षति हुयी है जो शेष 24 वर्षो में 346 करोड़ रूपए की और होगी।
उन्होंने बताया कि गत वर्ष सीएजी रिपोर्ट में खुलासा किया गया था कि बारा में अधिक दाम पर बिजली खरीदने से 10832 करोड़ रूपए और आगरा में टोरेन्ट के साथ गलत करार के कारण 5022 करोड़ रूपए की क्षति होगी। उन्होंने कहा कि मात्र 4 करारों में 25 हजार करोड़ रूपए से अधिक की क्षति के खुलासे के बाद प्रदेश सरकार की निजी घरानों के प्रति रियायत का पर्दाफाश हो चुका है।