#नेपाल सीमा पर भारतीय तराई क्षेत्र में भी तनाव : व्यापार में भी मुश्किलें
#नेपाल सीमा पर भारतीय तराई क्षेत्र में भी तनाव : व्यापार में भी मुश्किलें
मोदी को अपमानित करते हुए और भारत विरोधी पोस्टर भी लगाए जा रहे हैं
मोदी के रवैये ने भारतीय तराईवासियोँ के सामने भी बड़ा संकट खड़ा कर दिया है
लखीमपुर खीरी। नेपाल की तराई मेँ मधेशी प्रदेश बनाने के आन्दोलन के चलते तनाव गहराता जा रहा है। इस आन्दोलन मेँ माओवादियोँ के दखल ने भारतीयोँ के लिए स्थिति और भी जटिल बना दी है।
मित्र देश होने के नाते खुली सीमा के चलते लोगोँ की आवाजाही कुछ दिनोँ से एकदम बन्द है। भारत-नेपाल के बाशिन्दोँ मेँ रोटी-बेटी के सम्बन्धोँ पर भी ग्रहण लगता दिख रहा है।
भारतीय तराई क्षेत्र के जिलोँ के सीमावर्ती क्षेत्रोँ के बहुतेरे लोग ऎसे हैँ जो रहते भारतीय तराई में हैं, लेकिन उनकी दुकानें, उनका व्यापार नेपाल की तराई के जिलों में है, उनका रोज का आना जाना है। पिछले कुछ दिनों से उनका नेपाल जाना बन्द कर दिया गया है। उनका व्यापार ठप पड़ा है, दुकाने मे ताले लगे हैं।
नेपाली संविधान को लेकर भारतीय बयान ने आग मेँ घी डालने का काम किया है। माओवादियोँ द्वारा इसे नेपाल के आन्तरिक मामलोँ मेँ दखल बताकर मधेशी, पहाड़ी व अन्य लोगों को भडकाया जा रहा है। भारतीयोँ की पिटाई का दौर भी शुरू हो चुका है। जँगलोँ के बीच से जो पैदल या साइकिल से आने-जाने के रास्ते हैँ, उन से नेपाली अभी भी अपने काम से भारतीय तराई क्षेत्र मेँ आ रहे हैँ। भारतीय तराई क्षेत्र के लोगोँ के धैर्य की सराहना की जानी चाहिए कि वह उन नेपालियोँ की पिटाई नहीँ कर रहे हैं। जिस दिन भारतीय तराई क्षेत्र के लोगोँ ने धैर्य खोया उस दिन स्थिति विस्फोटक हो जाएगी।
नेपाल में तो अब खुली सीमा को कँटीले तार लगा कर बन्द करने की माँगें उठने लगी हैं। मोदी को अपमानित करते हुए और भारत विरोधी पोस्टर भी लगाए जा रहे हैं। सिक्किम दार्जिलिँग को लेकर सीमा विवाद को उछाला जा रहा है। चीन को तरजीह देते हुए वहाँ के नेताओं के वक्तव्य आ रहे हैँ। कश्मीर को पाकिस्तान को सौँपने की माँगें भी उठायी जा रही हैँ। उनका कहना है कि अगर भारत उनके आन्तरिक मामले ( संविधान ) में दखल दे सकता है, तो हम भी यह करने मेँ पीछे नहीं रहेंगे और यह सब चीन के इशारे पर वहाँ सक्रिय माओवादी करवा रहे हैँ।
मोदी के रवैये ने भारतीय तराईवासियोँ के सामने भी आज एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है आप सभी को भी इसे अपने सँज्ञान मेँ लेना ही होगा।
रामेंद्र जनवार


