नोटबंदी - एक हत्याारी योजना

महेश रा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बेहत नाटकीय तरीके से की गई नोटबंदी योजना की घोषणा ना केवल लोगों में भूख और बेकारी का कारण बन रही है बल्कि दिन प्रतिदिन इस योजना के कारण जान गंवाने वाले लोगों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर अब इसे ‘एक हत्याारी योजना’ ही कहना सही होगा।

अभी तक मीडिया में 70 से अधिक मौतों के दावे किए जा रहे हैं और 60 अथवा उससे अधिक लोगों की मौत की जानकारी विभिन्न समाचारपत्रों में प्रकाशित हो चुकी हैं।

इतनी मौतों के बावजूद भी संवेधानिकहीन मोदी सरकार और उसके मंत्री योजना की कामयाबी और कालेधन पर लगाम लगाने के हवाले दावे करने और मरने वालों को लेकर असंवेदनशीलता से बयान देने से बाज नहीं आ रहे हैं।

हर नए दिन के साथ बैंकों में लगी कतारें जहां कम नहीं हो रही हैं तो वहीं दूसरी तरफ मरने वालों की संख्या में इजाफा भी कर रही हैं। इन होने वाली मौतों का एक दर्जन आंकड़ा भी है कि मरने वालों में अधिकतर बुजुर्ग और महिलाएं बच्चे अथवा बीमार शामिल हैं। मीडिया में 70 के लगभग मौतों के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन यह खबरें केवल कस्बों और शहरों तक की हैं जहां तक मीडिया की पहुंच है। देश के दूरदराज के ग्रामीण और आदिवासी इलाकों जहां होने वाली मौतों की खबर मीडिया तक नहीं पहुंच पाती है यदि उन्हें भी इसमें शामिल किया जाए तो नोटबंदी के कारण होने वाली मौतों का आंकड़ा 100 से भी अधिक होने की संभावना जताई जा रही है।

नोटबंदी से हुई मौतों की ऐसी ही खबरें जो मीडिया के विभिन्न माध्यमों से सामने आई हैं उनकी एक सूची यहां प्रकाशित कर रही हैं -

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