नोटबंदी - जनता की दौलत पर डाका, पीएम के यार सरमायेदारों पर लुटाने के लिए
मधुवन दत्त चतुर्वेदी

'फेयर & लवली-2' या 'फिफ्टी-फिफ्टी' का आना सिद्ध करता है कि नोटबंदी कालाधन के खिलाफ केंद्रित नहीं थी। निकासियों पर पाबंदी बताती है, इसका मकसद अनिवार्य जमा था।
यह तानाशाही पूर्ण फैसला जनता की दौलत पर डाका डालकर उसे पीएम के यार सरमायेदारों पर लुटाने के लिए था।
'ईमानदारी का उत्सव' नरमेध-यज्ञ में बदल चुका है। कुछ मर चुके हैं और शेष मरमर कर जी रहे हैं। श्वेत-श्याम के भेद मिट गए हैं और यह आपकी सूझबूझ से संभव हुआ है।

आपने पेट्रोल-पम्प सहित कुछ खास जगहों पर श्याम को श्वेत में कायाकल्प का वरदान जो दिया है।
बहुतों को आप पहले ही जीवनदान दे चुके थे, जो आपके अपने थे। आपकी विलक्षण बुद्धि के लोग कायल हो चुके हैं।
सर्वत्र आपकी जय जयकार हो रही है।
जय जयकार करने वालों में अब वे अग्रणी हैं। वस्तुतः अब वे ही हैं, क्योंकि आपके नरमेध के लाभार्थी वही हैं।
प्रजाजन पीड़ा के उस सोपान पर हैं जहाँ आह निकलना बंद हो जाती है।
आपकी परपीड़क प्रवृति का निचला स्तर नापने के लिए हम और कितना डूबें , सम्राट ?
'ईमानदारी के उत्सव' में क्या-क्या होम नहीं हो रहा !
आज पढ़ा-' कानपुर में एक लाख श्रमिकों की रोजी रोटी छिनी'।

'कानपुर में चमड़ा कारोबार 60 फीसदी धराशाही : 50 फीसदी मजदूर घरों को लौटे'।
यह भी पढ़ा-'फीरोजाबाद में नोटबंदी ने लील ली चूड़ियों की खनक: आधे कारखाने बंद:60 फीसदी गिरा उत्पादन'। 'आगरा के एक स्कूल में फीस न देने पर छात्र को निकाला : सौ के नोट देने के लिए दबाब बनाया : बंधक बनाने का भी आरोप'।
ऐसी खबरें आम हो गयी हैं। भक्तगण कीर्तन कर रहे हैं, बागों में बहार है।
तुम वाकई शेर होते तो, 'फेयर & लवली-1' में आखिरी मौके के बाद 'नोटबंदी' और नोटबंदी के बाद 'फेयर & लवली -2' नहीं लाते।
चलो वो भी एक हद तक हमने मानली होती यदि तुमने स्कीम-2 के बाद बचे कालाधन वालों को कोई सख्त सजा तजबीज की होती।
तुम तो कह रहे हो कि फिर भी कोई बच गया और उसपर 100 रु मिले काले धन के तो हम उसे 15 रु देकर इज्जतदार बने रहने देंगे।

फिर ईमानदारों की फजीहत क्यों की है ? उन्हें मोहताज क्यों किया है ?
नोटबंदी कालाधन पर हमला नहीं थी। होती तो कालेधन में सरकार के आधेसाझे की नई स्कीम 'फेयर & लवली-2' लाने की जरुरत क्या थी ?
शुक्रिया मोदी जी ! भाषा-विज्ञान को आपका अविस्मरणीय योगदान है। 'थूक कर चाटना' और 'शेर की खाल में गीदड़' जैसे कई मुहाबरों और लोकोक्तियों को आपने एक में समेट दिया - 'फेयर & लवली फेज-2'.
कैशलेस हो गया हूँ, इकोनॉमी कब होगी कैशलेस ?
आसपास कोई एटीएम चालू नहीं है। जिनसे खरीद सकता हूँ जरूरी चीजें, उनमें से कोई भी प्लास्टिक मनी या ऑनलाइन पेमेंट नहीं लेता। पीएम को मेल करूँ डेली नीड्स की सप्लाई के लिए ?
पेट्रोल पम्पस के जरिये भी बहुत सारे काले धनवालों ने पुराने नोट बदले हैं। देश में कुल कितने पेट्रोल पम्प हैं ?
आठ तारीख से अब तक कितना कैश उनके जरिये बैंक पहुंचा ? उसमें से 1000 और 500 के कितने नोट थे। छोटी करेंसी कितनी थी ? क्या मोदी ने जानबूझकर यह ढील दी थी ?

'ईमानदारी के उत्सव' में उल्लास क्यों नहीं है मोदी जी ?
हाहाकार है हर तरफ। डराबनी ख़बरें हैं। छोटे छोटे कारोबार ठप हैं। मंडियां सूनी हैं। सिनेमा हाल खाली हैं। मजदूर किसान और दस्तकार हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। बच्चे मायूस हैं। शौकीन मध्यवर्गीय महिलाएं भी शॉपिंग नहीं कर पा रहीं। फल और सब्जियां सड़ रहे हैं। आटा-दाल उड़ रहे हैं। करीब सौ लोग मर चुके हैं और बाकी के लोग मरमर कर जी रहे हैं।
'ईमानदारी के उत्सव' में उल्लास क्यों नहीं है मोदी जी ?