नोटबंदी : सवाल जनता के, जवाब जनता के
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संजय पराठे
डिस्क्लेमर : यह मोलिक रचना नहीं है। किसी भी प्रकार की मोलिकता पाए जाने पर भक्तगण लिखने को कोई दावा नहीं कर सकते।
सवाल : काला धन किसके पास है?
जवाब : धन संप्रदाय हो या काला, रहेगा उसके पास ही, जो संप्रदायशाली है। हाल ही में जारी 'शोर्ब्स' की रिपोर्ट कहती है कि भारत में 1% धनिकों के पास देश की कुल संप्राप्ति का 53% और 10% धनिकों के पास 76% से ज्यादा है।
'न्यू वर्ल्ड वेल्थ सर्वे' के अनुसार, जून 2016 में हमारे देश की कुल संप्राप्ति 3.75 लाख अरब रूपये थी।
इसका अर्थ है कि देश में रहने वाले 13 करोड़ लोगों के पास 2.85 लाख अरब रूपयों की संप्राप्ति है, जबकि 112 करोड़ लोगों के पास केवल 90 हजार अरब रूपयों की ही।
इसका यह भी अर्थ है कि धनकुबेरों की प्रति व्यक्ति उसकी संप्राप्ति और कंगालों की प्रति व्यक्ति उसकी संप्राप्ति का फासला 30 गुना है।
80% जनता की ओसत संप्राप्ति तो केवल 60000 रूपये प्रति व्यक्ति है और उसके तो जीने के ही लाले पड़े हुए हैं। इसलिए काला धन भी वहीं से निकलेंगे, जिनके पास अकूत संप्राप्ति है।
सवाल : तो इन बज़े लोगों के पास कितनी काला धन है?
जवाब : इतना की अनुमान लगाना मुश्किल है !
रिचर बैंक का मानना है कि हमारी कुल जीडीपी का 25% हर साल का काला धन के रूप में पैंदा होता है, जबकि स्वतंत्र अध्ययन इसे 62% तक मानते हैं।
यदि इसके बीच के आंकड़े ही लिए जाएं, तब भी हमारी अर्थव्यवस्था का 45% यानी लगभग 67 लाख करोड़ रूपयों का काला धन हर साल पैंदा होता है, क्योंकि हमारी अर्थव्यवस्था का कुल आकार लगभग 150 लाख करोड़ रूपयों का है। अतर, पिछले 15 वर्षों में 1000 लाख करोड़ रूपयों का काला धन पैदा होना माना जा सकता है।
इस काले धन में हमारे कई बजट डूब जाएंगे।
सवाल : लेकिन यह काला धन पैदा कैसे होता है?
जवाब : यह वह धन है, जो कोई व्यक्तियों 'अवैध' तरीके से कमाता है और उस पर कोई टैक्स नहीं देता। यह कई तरीकों से पैदा हो सकता है, उदाहरणन :


