न्याय और शान्ति के लिए श्रद्धान्जलि सभा शनिवार को
न्याय और शान्ति के लिए श्रद्धान्जलि सभा शनिवार को
सिंगरौली। सिंगरौली के नागरिक समाज ने पिछले वर्ष 13 दिसम्बर 2013 को 27 वर्षीय अखिलेश शाह और 26 वर्षीय नकीब अहमद सिद्दकी की असमय मौत को याद करते हुए इस वर्ष 13 दिसम्बर को एक श्रद्धांजलि सभा के आयोजन का निर्णय लिया है। इस सभा में दोनों युवा साथियों की याद में दो मिनट का मौन भी रखा जायेगा। इस श्रद्धांजलि सभा के आयोजन में लगे शहर के वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मीचन्द दुबे ने बताया कि यह आयोजन जय स्तम्भ बैढन में शनिवार को दोपहर 3 बजे से किया जा रहा है।
इस सिलसिले में जानकारी देते हुए लक्ष्मी चन्द दुबे ने बताया कि यह आयोजन बैढन के जय स्तम्भ पर किया जायेगा। शनिवार 13 दिसम्बर को शाम 3 बजे से आयोजित इस श्रद्धान्जलि सभा में भाग लेने के लिए रीवा से समाजवादी जन परिषद के नेता श्री अजय खरे, सीधी से टोको रोको ठोको क्रान्तिकारी मोर्चा के संयोजक उमेश तिवारी विशेष रूप से आ रहे हैं।
किसान आदिवासी विस्थापित एकता मंच की सदस्य और सभा के आयोजन में सहयोगी एकता ने बताया कि अखिलेश की विवादास्पद मृत्यु और गोली काण्ड के फलस्वरूप नकीब की बेवजह मौत के एक साल बाद भी जांच में कोई प्रगति नहीं हुई है। जांच में ढिलाई दोषियों को बचाने के लिए बरती जा रही है। एकता ने आगे कहा कि इस एक वर्ष में सैकड़ों एफ0आआई0आर0 हुए, गिरफ्तारियाँ हुयीं, पेशियाँ हुयीं, कमेटियाँ बनी, गवाहियाँ हुयी, जमानत-जेल सब हुए, बस न्याय नहीं हुआ, और न ही कुछ ऐसा हुआ, जिससे न्याय मिलने की आशा जगती हो।
इस श्रद्धान्जलि सभा के आयोजन में शिरकत कर रहे और मृत नकीब के परिवार के सदस्य शमीम खान ने बताया कि यह श्रद्धान्जलि सभा, केवल मृत आत्माओं की शान्ति के लिए ही नहीं, बल्कि दोषियों को चिन्हित कर जल्द से जल्द सजा देने की मांग के लिए भी की जा रही है। सिंगरौली की अमन पसंद जनता से इस श्रद्धान्जलि सभा में शामिल होने का आग्रह करते हुए श्री खान ने कहा कि लोगों के आने से न केवल परिवार का दुख बंटेगा बल्कि न्याय पाने की आशा भी जगेगी।
ज्ञात हो कि, इसी दिन, पिछले वर्ष 13 दिसम्बर 2013 को, 27 वर्षीय एक युवक अखिलेश का मृत शरीर बरामद हुआ और पुलिस के व्यवहार के प्रति अपना असंतोष व्यक्त करने जुटी जनता पर पुलिस द्वारा गोली चलाई गई, परिणाम स्वरूप नकीब अहमद सिद्दकी, 26 वर्ष की बेवजह मौत हो गई, जब वे नमाज पढ़ने मस्जिद जा रहे थे।


