पदोन्नति में आरक्षण की बहाली
संविधान संशोधन हेतु चलाया जायेगा हस्ताक्षर अभियान- आइपीएफ
लखनऊ: 27 सितम्बर, 2015. पदोन्नति में आरक्षण की बहाली हेतु संविधान संशोधन ज़रूरी है. यह बात आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के राष्ट्रीय प्रवक्ता एस. आर. दारापुरी पूर्व आई. जी. एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कही. उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के एम. नागराज (2006) मामले में अनुसूचित जातियों/ जनजातियों के कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण देने हेतु उन के पिछड़ेपन के सम्बन्ध में आंकड़े प्रस्तुत करने की जो शर्त लगायी गयी है वह न तो संविधान सम्मत है और न ही व्यवहारिक है. उन्होंने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि संविधान की धरा 15(4) व् 16(4) में अनुसूचित जातियों को सभी प्रकार से पिछड़ा मान कर आरक्षण देने की बात कही गयी है. सुप्रीम कोर्ट ने स्वयम भी एक मामले में इन जातियों को न केवल पिछड़ा बल्कि अति पिछड़ा माना है. इसके अतिरिक्त संविधान की धारा 335 में भी इन जातियों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने की बात स्पष्ट रूप से कही गयी है.
श्री दारापुरी ने आगे बताया कि सुप्रीम कोर्ट के उपरोक्त निर्णय को निष्प्रभावी बनाने के लिए 2012 में राज्य सभा में 117वां संविधान संशोधन बिल पारित किया गया था जिस में यह कहा गया था कि अनुसूचित जातियां तथा अनुसूचित जनजातियां पिछड़ी हैं और उन्हें पदोन्नति में आरक्षण तथा परिणामी ज्येष्ठता का लाभ दिया जा सकता है. परन्तु दुर्भाग्य से उक्त बिल लोक सभा में समाजवादी पार्टी द्वारा विरोध करने तथा बिल को एक दलित सांसद द्वारा फड़वाने के कारण पेश नहीं किया जा सका और अब वह बिल लेप्स कर गया है. अतः अब संविधान संशोधन हेतु दोबारा बिल लाने की ज़रुरत है.
अब तक संविधान संशोधन न होने के कारण पूरे देश में दलितों की पदोन्नति में आरक्षण पर रोक लगी हुयी है. उत्तर प्रदेश में 20,000 से अधिक दलित अधिकारियों की पदावनति हो चुकी है. अतः इस सम्बन्ध में आइपीएफ ने कई अन्य दलित संगठनों के साथ मिल कर केन्द्रीय सरकार तथा अन्य राजनीतिक पार्टियों पर संविधान संशोधन हेतु बिल लाने तथा राज्य सभा तथा लोक सभा में पास कराने हेतु दबाव बनाने का अभियान शुरू किया है. इस सम्बन्ध में माननीय प्रधान मंत्री को एक ज्ञापन भेजा जायेगा जिस के लिए हस्ताक्षर अभियान चलाया जा रहा है.