परिवर्तनकारी ताकतों का एकजुट होना ऐतिहासिक आवश्यकता -डॉ सुनीलम
परिवर्तनकारी ताकतों का एकजुट होना ऐतिहासिक आवश्यकता -डॉ सुनीलम
समाजवादी समागम सम्पन्न
सिंगरौली जनआन्दोलनों का समन्वय निर्माण के लिए समिति गठित
सिंगरौली। समाजवादी समागम की प्रकिया का राष्ट्रीय स्तर पर समन्वय करने वाले पूर्व विधायक डॉ सुनीलम ने कहा है कि वर्तमान चुनौतियों का मुकाबला कोई भी एक व्यक्ति, संगठन या पार्टी करनें में सक्षम नहीं है। ऐसी स्थिति में परिवर्तनकारी शक्तियों को मिल कर संगठित रूप से आन्दोलन चलाने की जरूरत है।
डॉ. सुनीलम कॉलेज रोड, बिलौजी सिंगरौली में सम्पन्न समाजवादी समागम को संबोधित कर रहे थे। सम्मेलन में 10-11 अगस्त को पनवेल में आयोजित सम्मेलन में पारित प्रस्ताव पर चर्चा की गई। सम्मेलन में विस्थापन, एफडीआई, गैर बराबरी, सार्वजनीक सम्पत्ति के निजीकरण, साम्प्रदायिक, जातिवादी शक्तियां और उनके कारनामों को चुनौती, भूमि, पानी, श्रमिकों के अधिकार तथा चुनाव प्रणाली में बुनियाद बदलाव पर संवाद और राष्ट्रीय स्तर पर अभियान चलानें पर सहमति बनी।
सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए डॉ सुनीलम ने कहा कि वर्तमान विकास का मॉडल अमेरिका और यूरोप के मॉडल से प्रेरित है जिस पर कांग्रेस पार्टी और भाजपा की एक समझ है जिसका परिणाम गांव, किसान और किसानी का खात्मा ही है। उन्होंने कहा कि हमारी जरूरत वैकल्पिक विकास की नीति विकसित करने की है। इन वैकल्पिक नीतियों को लेकर एक साल बाद पूरे देश में यात्रा प्रस्तावित है। इन नीतियों को तैयार करने में सिंगरौली के किसान, आदिवासी, विस्थापित, महिलाओं और युवाओं को आगे आना चाहिए।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए रवि शेखर ने कहा कि हमें वैकल्पिक उर्जा नीति विकसित करने की जरूरत है जिसमें उत्पादन और वितरण विकेन्द्रित तौर पर किया जाय।
एकता ने कहा कि महिलाओं के भगीदारी के बिना कोई भी आन्दोलन नहीं जीता जा सकता। उन्होंने अपील की कि सभी कार्यकर्ता महिलाओं को कार्यक्रम से जोड़ें।
अवधेश कुमार ने कहा कि मेरा लगभग 30 वर्षों का विस्थापितों के साथ काम करने का अनुभव यह बताता है कि सरकारें विस्थापितों के प्रति अपराधिक संवेदनहीनता बरतती हैं। न्यायपालिका ने भी देश के 10 करोड़ विस्थापितों के साथ सम्पूर्ण न्याय नहीं किया।
के0सी0 शर्मा ने कहा कि सिंगरौली में लगभग भोजन की प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है। अब सवाल यह है कि विस्थापित यदि अत्यधिक प्रदूषण से बीमार पड़ते हैं तो शासन उनका इलाज करायेगा या नही। विस्थापितों को रोजगार देगा या नहीं।
लक्ष्मी चन्द दुबे ने कहा कि विंध्य का इलाका समाजवादियों का गढ़ रहा है। लेकिन पूंजीवादियों कम्पनियों तथा पार्टीयों ने मिलकर समाजवादियों को तोड़ा है हमें फिर से एकजुट होकर संघर्ष करने की जरूरत है।
अम्बिका नामदेव ने कहा कि पूंजीवाद का विकल्प समाजवाद ही हो सकता है। इसलिए हमें समाजवादी विचार का प्रशिक्षण युवाओं को देना चाहिए।
समागम में किसान आदिवासी विस्थापित एकता मंच के संयोजक लक्ष्मीचन्द दुबे, उद्वासित किसान मजदूर परिषद के अध्यक्ष के0सी0 शर्मा, लोकहित समिति अध्यक्ष अवधेश कुमार, मयूर संगठन के अध्यक्ष विकास देव पाण्डे, ज्योति समाज शिक्षा समिति के अध्यक्ष हरिशचन्द कुशवाहा, सहित विभिन्न परियोजनाओं के पीडित प्रतिनीधि शामिल हुए।
समागम में सिगरौली जिले के कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण हेतु संयोजित समिति का गठन किया गया जिसमें सूर्यकान्त द्विवेदी, मदन मोहन जायसवाल, हरिशचन्द्र कुशवाहा, रामलल्लू शाह, अम्बिका नामदेव, अजित जैन, तथा रवि एवं एकता को शामिल किया गया। जिले स्तर पर समाजपादी समागम आयोजित करने के लिए किसान आदिवासी विस्थापित एकता मंच, लोकहित समिति, ज्योति शिक्षा विकास समिति, मयूर संगठन, को जिम्मेदारी सौपी गई। इस समिति को सिंगरौली ने सभी जन संगठनों से बातचीत कर सिंगरौली जनसंगठनों के राष्ट्रीय समन्वय का गठन करने की जिम्मेदारी सौंपी।
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