उत्तर प्रदेश में अपने राजनीतिक वजूद की लड़ाई लड़ रही कांग्रेस अब समाजवादी पार्टी के साथ चुनावी गठबंधन में बंध चुकी है और इसे अपनी बड़ी कामयाबी मान रही है। लेकिन चुनावी माहौल में बने इस गठजोड़ की नई कहानी को लिखने में प्रियंका गांधी की खास भूमिका रही है।

सीट बंटवारे की खींचतान में एकबारगी शनिवार को गठबंधन बनने से पहले ही दम तोड़ता हुआ नज़र आ रहा था और तब उस नाज़ुक दौर में प्रियंका ने ही सपा प्रमुख और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से सीधे संपर्क साधा। और तब जाकर एक फॉर्मूले पर सहमति बनी।

यानी एक तरह से कहा जाए तो प्रियंका गांधी राजनीति में कदम रख चुकी हैं।

कांग्रेस और सपा के गठबंधन को प्रियंका गांधी के 'राजनीतिक लॉन्च' के तौर पर भी देखा जा रहा है।

गठबंधन के पीछे प्रियंका की भूमिका की खबरें पहले भी आती रही हैं, पर पहली बार कांग्रेस के सीनियर नेता खुले तौर पर गठबंधन होने का श्रेय प्रियंका गांधी को देते नजर आ रहे हैं।

सपा से गठबंधन के सिलसिले में सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल के ट्वीट से पहली बार प्रियंका की भूमिका की बात खुलकर सामने आई। सपा से गठबंधन को लेकर चल रही बातचीत को लेकर सामने आ रही कुछ खबरों पर उन्होंने लिखा,

'यह कहना गलत है कि कांग्रेस की ओर से कम महत्वपूर्ण नेता गठबंधन को डील कर रहे थे। बातचीत उच्चतम स्तर पर यूपी के सीएम और कांग्रेस के प्रभारी महासचिव गुलाम नबी आजाद और प्रियंका गांधी के बीच चल रही थी।'

बाद में गुलाम नबी आजाद ने भी प्रियंका को यह कहते हुए धन्यवाद दिया कि गठबंधन फाइनल करने में उनकी भूमिका अहम रही।

आपको बता दें कि अभी तक प्रियंका खुद को अमेठी और रायबरेली संसदीय क्षेत्र के चुनाव तक सीमित रखती रही हैं जिसका प्रतिनिधित्व उनके भाई राहुल गांधी और मां सोनिया गांधी करती हैं। लेकिन पिछले काफी वक्त से ही प्रियंका गांधी के राजनीति में कदम रखने की मांग उठती रही है, जिसके बाद प्रियंका इन चुनावों में अब काफी सक्रिय नज़र आ रही है यहां तक की अभी तक जितनी अहम बैठकें हुईं, प्रियंका उनमें शामिल रहीं।

इतना ही नहीं..ख़बर ये भी है नवजोत सिंह सिद्धू को कांग्रेस ज्वाइन कराने में भी प्रियंका का रोल रहा है।