पुलिस चाहे तो 2 घंटे में दंगा रोक सकती है
पुलिस चाहे तो 2 घंटे में दंगा रोक सकती है
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के स्पेशल रिपोटियार का दंगा प्रभावित क्षेत्र "छीपाबड़" ( मध्य प्रदेश ) का दौरा
उल्लेखनीय है मध्यप्रदेश के हरदा जिले के (खिरकिया ब्लॉक) छीपाबड़ खेड़ा में बीती 19 सितंबर 2013 को साम्प्रदायिक हिंसा हुई थी। जिसकी एनएसआई भोपाल, भा.क.पा.(माले), राष्ट्रीय सेकूलर मंच, क्रांतिकारी नौजवान भारत सभा, पीपुल्स रिसर्च सोसायटी और नागरिक अधिकार मंच द्वारा 27 सिंतबर 2013 को फैक्ट फाइंडि़ग की़ गई थी। इन संगठनों द्वारा इस फैक्ट फाइंडि़ग रिर्पोट को सम्बंधित प्रशासनिक अधिकारियों व आयोगों को भी भेजा गया था। इसकी कड़ी में संगठनों द्वारा दिनांक 16 अक्टूबर 2013 को भी पुनः छीपाबड़ के दंगा प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया गया था। इसी सन्दर्भ में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के स्पेशल रिपोटियार प्रोफ़ेसर सचीन्द्र नारायण ने दिनाँक 18 और 19 दिसम्बर 2013 को दंगा से प्रभावित इस क्षेत्र में भ्रमण किया गया था और पीड़ितों से मुलाकात की थी।
स्पेशल रिपोटियार के दौरे से सम्बंधित जानकारी देते हुए सामाजक कार्यकर्ता जावेद अनीस ने बताया कि पीड़ितों द्वारा स्पेशल रिपोटियार को बताया गया कि अभी भी कई ऐसे दंगाई हैं जो पुलिस की गिरफ्त से बाहर है और उनके नाम एफ.आई.आर.में दर्ज हैं। स्पेशल रिपोटियार द्वारा पीड़ितों से उन लोगों के नाम की लिस्ट बना कर उन्हें उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है जो दंगे में शामिल थे लेकिन अभी भी पुलिस के गिरफ्त से बाहर है।
स्थानीय मीडिया से बातचीत के दौरान स्पेशल रिपोटियार ने कहा कि वे दंगों के दौरान पुलिस की भूमिका से संतुष्ट नहीं है। क्योंकि अगर पुलिस चाहे तो 2 घंटे में दंगा रोक सकती है लेकिन यहाँ यह नहीं हुआ। अगर पुलिस सही कार्यवाही करती तो घटना इतनी बढ़ती ही नही। उन्होनें कहा कि आगे ऐसी घटना की पुनरावृत्ति ना हो इसके लिए प्रशासन को दोनों समुदाय के साथ मिल कर कार्यक्रम चलाये जाने की जरूरत है।
स्पेशल रिपोटियार ने प्रशासन को यह भी आदेश दिया कि वह पीडि़तों के स्थायी पुर्नवास का कार्यक्रम बनाये जिसमें पीड़ितों का आर्थिक और सामाजिक पुर्नवास की व्यवस्था हो, प्रशासन को पीड़ितों के लिए सम्पूर्ण पुर्नवास कार्यक्रम 6 माह के अंदर तैयार किये जाने तय हुआ है।


