नई दिल्ली 4 अगस्त:- पूर्वांचल एकता मंच के आहवान पर भोजपुरी संगठनों एवं संस्थाओं ने भोजपुरी को संविधान के अष्टम अनुसूची में शामिल करने हेतू बारिश पड़ने के बावजूद जंतर-मंतर पर धरना प्रर्दशन किया। यह सर्वविदित है कि भोजपुरी एक मधुर एवं लोकप्रिय भाषा है जिसके बोलने वालों की संख्या पूरी दुनियाँ में 25 करोड़ से भी अधिक है। भोजपुरी का साहित्य भी अत्यंत समृद्ध है। भोजपुरी भाषा एवं साहित्य का पठन-पाठन भारत के बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, छतीगढ़ प्रान्तों और सात समंदर पार के मॉरीशस, फिजी, गयाना, नेपाल, हाॅलैण्ड आदि में हो रहा है जबकि अनेक विश्वविद्यालयों में पी.एच.डी. स्तर तक की पढ़ाई हो रही है। भोजपुरी के लोकगीत-संगीत का जादू समुचा दुनियाँ के कोने-कोने में छाया हुआ है। भोजपुरी फिल्मों ने भी पूरे विश्व मे अपना परचम लहराया है। भोजपुरी भाषा व संस्कृति का अपनी विशेषताओं के बल पर स्वंय प्रचार-प्रसार हो रहा है, परन्तु भोजपुरी भाषा को उसका वास्तविक अधिकार तब मिलेगा जब उसे संविधान की अष्टम अनुसूची मे सम्मिलित कर लिया जाएगा।

इस अवसर पर पूर्वांचल एकता मंच के अध्यक्ष शिवजी सिंह ने कहा कि सरकार अगर मानसून सत्र मे भोजपुरी को अष्टम अनुसूची मे शामिल करने का प्रस्ताव नहीं लाती है तो अगली बार हम पूरी दिल्ली का चक्का जाम कर देगें तथा अगले लोकसभा और विधान सभा चुनाव में हम उन्हीं को वोट देगें जो पूर्वांचलवासियों के मान सम्मान के लिए लड़ेगा।

मंच के संयोजक चंद्रशेखर राय ने कहा भोजपुरी हमारी मातृ भाषा है और जिस तरह हम अपने माँ का सम्मान करते है। उसी प्रकार केंद्र सरकार भोजपुरी भाषा-भाषियों का सम्मान करते हुए इसको तत्काल अष्टम अनुसूची मे शामिल करें। सांसद महाबल मिश्रा ने कहा कि उनकी सरकार भोजपुरी को अष्टम अनुसूची मे लाने हेतू गंभीर व कृतसंकल्प है। इस मुद्दे पर किसी भी पार्टी मे मतभेद नहीं है। इस अवसर पर देश-विदेश से आए नेतागण और साहित्यकारों ने भोजपुरी को 8वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग को अपनी अवाज से मजबूत किया।