डुमरियागंज। इस लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहे खांटी समाजवादी माता प्रसाद पांडेय अपने विरोधियों पर भरी पड़ रहे है। उनके सामने खड़े जगदम्बिका पाल से लेकर मुकीम तक घोषित दलबदलू बताए जा रहे हैं इसी वजह से पांडेय की स्थिति में तेजी से सुधार हो रहा है। यह नेपाल की तराई का इलाका है जिसमें मुस्लिम मतदाताओं का रुख हार और जीत का फैसला करता है। समाजवादी नेता डॉ. सुनीलम मध्य प्रदेश से सिर्फ माता प्रसाद पांडेय का प्रचार करने डुमरियागंज पहुंचे और दो दिन में बासी से लेकर शोहरतगढ़ के दर्जनों गांवों में छोटी बड़ी कई जन सभाएं की।
अपनी जन सभाओं में डॉ. सुनीलम ने कहा- नेता, नीति और नियत तीनों पर समाजवादी माता प्रसाद पांडेय खरे उतरते हैं। इसे समझने के लिए सिर्फ दूसरे दलों के उम्मीदवारों पर नजर डाल लें, सब साफ़ हो जाएगा। ये दलबदल और अवसरवाद के प्रतीक हैं। कोई खुद दल बदल रहा है तो कोई दूसरे दल में शामिल अपनी पत्नी का प्रचार कर रहा है। माता प्रसाद पांडेय को लोग करीब से जानते हैं और इसी वजह से वे इस चुनाव में सबसे आगे चल रहे हैं।
गौरतलब है कि माता प्रसाद पांडेय स्वास्थ्य की वजह से इस बार लोकसभा का चुनाव लड़ने के पक्ष में नहीं थे और यह बात उन्होंने इस संवाददाता से कही भी। पर मुलायम सिंह यादव के दबाव के चलते उन्हें चुनाव लड़ना पड़ा। वे गाँव गाँव जा रहे हैं अपने ही तरीके से। वे एक गाड़ी से चलते हैं बिना समर्थक के। उनके साथ कोई माइक भी नहीं होता। सीधे गाँव के भीतर और फिर जिस दरवाजे पर पहुँचते हैं उसके मुखिया का नाम लेकर बुलाते हैं। बातचीत करते हैं और समय रहा तो चाय पानी भी। गाँव में विपक्ष का प्रचार कर रहे लोगों के घर वे पहले जाते हैं और समर्थन मांगते हैं। जन सभाओं में वे विकास पर सवाल पूछते हैं, कितने लोगों को पेंशन मिली यह हाथ खड़ा कर पूछते हैं जिससे तस्वीर भी साफ़ हो जाती है।
माता प्रसाद पांडेय ने अपने दौर में काफी संघर्ष किया है और बार बार जेल गए जिसके चलते पुरानी पीढ़ी उनके किसी परिचय कि मोहताज नहीं है। विधान सभा अध्यक्ष होने की वजह से शासन और आला अफसर उनकी बात को गंभीरता से लेते हैं जिसकी वजह से क्षेत्र के लोगों की ज्यादातर शिकायतें आराम से दूर हो जाती हैं। माता प्रसाद पाण्डेय के प्रचार में मुलायम सिंह और अखिलेश यादव् दोनों आने वाले हैं जिसके बाद उनका प्रचार अभियान और तेज हो जाएगा।
डॉ. सुनीलम ने मुस्लिम बहुल इलाकों में भी प्रचार किया और नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के खतरों को भी बताया। उन्होंने कहा कि संविधान की मूल धारणा ही बदल जाएगी। समाजवाद से लेकर समानता तक ख़त्म हो जाएगी । अडानी को अंबानी के बराबर पहुंचा देंगे मोदी और आम आदमी बदहाल हो जाएगा। धार्मिक कट्टरता के चलते समाज के बंटने का खतरा पैदा हो जाएगा। इसलिए इस बार के चुनाव में सोच समझ कर वोट देना जरूरी है।
जनादेश न्यूज़ नेटवर्क