प्रदेश में हुये सांप्रदायिक दंगों की आग से होगी अखिलेश सरकार राख- मोहम्मद शुऐब
प्रदेश में हुये सांप्रदायिक दंगों की आग से होगी अखिलेश सरकार राख- मोहम्मद शुऐब
लोकतंत्र का कत्ल है किसी बेगुनाह का कत्ल
बेगुनाहों की रिहाई के लिये जल उठी मशाल
विभिन्न दलों के मुस्लिम विधायकों, मंत्रियों के रुख पर सत्र के दौरान रहेगी रिहाई मंच की नजर
निमेष रिपोर्ट महज कागज का दस्तावेज नहीं बल्कि मरहूम मौलाना खालिद व तारिक कासमी की बेगुनाही का सबूत है- रिहाई मंच
लखनऊ, 15 सितम्बर 2013, रिहाई मंच धरना 117 वां दिन। रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुऐब ने कहा कि रिहाई की यह मशाल उन बेगुनाहों के नाम हैं जिनको इंसाफ देने से पहले ही सत्ताधारियों, पुलिस और आईबी के गठजोड़ ने कत्ल कर दिया। मौलाना खालिद की हत्या के बाद 22 मई 2013 से हम धरने पर बैठे हैं। यह धरना आतंक की उस राजनीति के खिलाफ है जिसने गुजरात में इशरत जहां, सादिक जमाल मेहतर, दिल्ली के बाटला हाउस में मारे गये आजमगढ़ के साजिद और आतिफ, महाराष्ट्र की पुणे की जेल में बंद बिहार दरभंगा निवासी कतील सिद्दीकी से होते हुये खालिद मुजाहिद की हत्या तक पहुँचा, उस कातिल हाथों को नेस्तानाबूद करने के संकल्प के साथ चल रहा है। रिहाई की मशाल उस काले कानून के खिलाफ है और उन सभी बेगुनाहों के साथ हैं जो कहीं मुस्लिम होने के नाते आतंकवाद, तो कहीं आदिवासी होने के नाते माओवाद के आरोप में बंद हैं। इंसाफ की इस जंग में शहादतों का दौर भी जारी है और हमने ठाना है कि शहादत तक यह जंग लड़ी जायेगी। हम प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से कहना चाहेंगे कि वो वादे के मुताबिक आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाहों की रिहाई और मरहूम खालिद मुजाहिद और तारिक कासमी की बेगुनाही का सबूत निमेष कमीशन पर मानसून सत्र में अमल करें। उन्होंने कहा कि पिछले डेढ़ साल के सपा राज में जिस तरह से प्रदेश में कोसी कलां, अस्थान प्रतापगढ़, फैजाबाद होते हुये जो सांप्रदायिकता की आग मुजफ्फर नगर और आस पास के जिलों में लगी उसने साफ कर दिया है कि प्रदेश सरकार इन दंगों के सहारे 2014 की चुनावी वैतरणी को पार करने की कोशिश कर रही है। लेकिन जिस तरीके से पिछले दिनों परिक्रमा के सवाल पर जनता ने मुलायम और सिंघल के बीच हुये सांप्रदायिक समझौते को नकारते हुये प्रदेश में शांति व्यवस्था बरकरार रखी उसने साफ कर दिया है कि अब जनता हिन्दू और मुस्लिम नहीं बल्कि अपने हक और इंसाफ के लिये लड़ेगी।
इंडियन नेशनल लीग के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहम्मद सुलेमान ने कहा कि आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाहों की रिहाई को लेकर शुरु हुआ यह रिहाई आन्दोलन आज समाज के हर उस वंचित तबके को जबान दे दिया है जिसके साथ अन्याय हो रहा है। यह पूरा आन्दोलन उस पूँजीवादी राजनीति के खिलाफ है जिसने लोकतंत्र को कैद कर लिया है। किसी बेगुनाह का जब कत्ल होता है तो वह लोकतंत्र का कत्ल होता है। आज जब रिहाई आन्दोलन के दबाव में आकर सरकारें यह कह रही हैं कि आतंकवाद के नाम पर बेगुनाह मुस्लिम नौजवान कैद हैं तब बड़ा सवाल उठता है कि हम किस निजाम में साँस ले रहे हैं जहाँ बेगुनाह जेलों में हैं। अखिलेश यादव पिछले 31 अगस्त 2012 से आरडी निमेष कमीशन की रिपोर्ट को दबाये रखे और दोषी पुलिस व आईबी के हौसले को इतने बुलन्द कर दिये कि उन लोगों ने हमारे बेगुनाह बच्चे का कत्ल कर दिया। हम मुख्यमंत्री से कहना चाहेंगे कि आरडी निमेष रिपोर्ट कागज के चन्द पन्ने नहीं हैं वो एक हकीकत है जिसे मुसलमान जानता है और झेलता चला आ रहा है। आज वो इंसाफ माँग रहा है, यह इंसाफ उस बेगुनाह बच्चे के लिये है जिसे कत्ल कर दिया पर आज भी उस पर आतंक का ठप्पा बेगुनाह होने के बाद भी लगा है। उन्होंने कहा कि हम उन सभी लोगों के साथ हैं जो हमारी इस इंसाफ की जंग में हमारे साथ रहे हैं। पिछले दिनों माओवाद के नाम पर गिरफ्तार प्रशांत राही, जीएन सांई बाबा और हेम मिश्रा जो की हक और अधिकारों के लिये लड़ते थे हम उनको तत्काल रिहा करने की पुरजोर माँग करते हैं।
आजमगढ़ रिहाई मंच के प्रभारी मसीहुद्दीन संजरी, इलाहाबाद रिहाई मंच के प्रभारी राघवेन्द्र प्रताप सिंह और तारिक शफीक ने कहा कि आतंकवाद के नाम पर मारे गये हमारे आजमगढ़ के बच्चों साजिद और आतिफ की बाटला हाउस में हत्या के बाद जिस तरीके से पूरे आजमगढ़ को आतंक के नाम पर बदनाम करते हुये मुस्लिम युवाओं को निशाना बनाया गया। हमारे गांव संजरपुर समेत आजमगढ़ के लोगों के साथ जब आतंक के नाम पर कहर बरपाया जा रहा था तो उस दौर में भी हमने अपने शोक को संकल्प में तब्दील कर इंसाफ की इस जंग में शामिल हुये। आज बेगुनाहों की रिहाई के लिये उठी यह रिहाई मशाल देश में आतंकवाद के नाम पर राजनीति करने वालों के लिये खिलाफ उठी है और जब तक हमें इंसाफ मिल नहीं जाता हमारे जो बच्चे मार दिये गये हैं वो तो आ नहीं सकते पर उनके और हमारे जो बच्चे जेलों में बंद हैं या कुछ को खुफिया एजेंसियों ने गायब कर रखा है जब तक अपने घरों तक नहीं पहुँच जाते तब तक रिहाई की यह मशाल जलती रहेगी। कल 16 सितंबर से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र में बेगुनाहों की रिहाई, निमेष आयोग की कार्यवाही रिपोर्ट और प्रदेश में घटित दंगों के मुद्दों पर विभिन्न राजनैतिक दलों के रुख और सभी मुस्लिम विधायकों और मंत्रियों की कारकर्दगी पर नजर रखेंगे। और उसे जनता के बीच में ले जायेंगे।
मशाल मार्च में शामिल होने के लिये झारखण्ड से आये सामाजिक कारकून मुन्ना कुमार झा ने कहा कि पूरे देश के अन्दर माओवाद और आतंकवाद के के नाम पर जल जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे आदिवासियों एवं वंचित तबकों को सरकारों और टाटा जिंदल द्वारा कत्लेआम किया जा रहा है। आज जिस तरह से बेगुनाहों की रिहाई के लिये यह मशाल जलाई गयी है उसकी लपटें आदिवासियों के खिलाफ चलाये जा रहे ऑपरेशन ग्रीन हंट, ऑपरेशन कोबरा जैसे राज्यसत्ता द्वारा प्रायोजित पूँजीवादी नीतियों को खाक कर देंगे।
भारतीय एकता पार्टी के अध्यक्ष सैयद मोईद अहमद और मुस्लिम मजलिस के नेता जैद अहमद फारुकी ने कहा कि आज रिहाई मशाल जुलूस से शुरु हुआ लखनऊ विधानसभा के सामने रिहाई मंच का घेरा डालो-डेरा डालो आन्दोलन तब तक चलेगा जब तक हमें इंसाफ नहीं मिल जाता। गर्मी में लू की थपेड़ों में शुरु हुआ यह आन्दोलन का एक-एक दिन संघर्ष के नए इतिहास का निर्माण कर रहा है। कल तक आतंकवाद के नाम पर पकड़े गये बेगुनाहों के पक्ष में लोग सरकारों के डर से नहीं बोलते थे पर आज जिस तरीके से लोगों ने रिहाई की मशाल उठा रखी है उसने साफ कर दिया है देश में लोकतंत्र को बचाने के लिये हम प्रतिबद्ध है। वहीं सरकारों पर भी यह सवाल उठता है कि वो लोकतंत्र को एक दमन तंत्र में तब्दील कर चुकी है, पर हमने भी संकल्प लिया है कि हम इस दमन तंत्र को नहीं चलने देंगे।
रिहाई मंच प्रवक्ता शाहनवाज आलम और राजीव यादव ने बताया कि आज रिहाई मशाल जुलूस में आतंकवाद के नाम पर पीड़ित और प्रदेश मे हुये दंगों के पीड़ितों के परिजन शामिल रहे। कल 16 सितंबर से शुरु होने वाली भूख हड़ताल में भी ये लोग शामिल होंगे।
रिहाई मंच के मशाल जुलूस में बाराबंकी से सूफी उबैर्दुरहमान, ताहिरा हसन, अरुन्धती ध्रुव, इंडियन नेशनल लीग के अध्यक्ष मो0 सुलेमान, रफीक सुल्तान, भगवान स्वरुप कटियार, रामकृष्ण, एडवोकेट समी, कानपुर से नदीम, आजमगढ़ से मसीहुद्दीन संजरी, मुस्लिम मजलिस के नेता शाह आलम शेरवानी, इलाहाबाद से राघवेन्द्र प्रताप सिंह, कमर इरशाद, इरफान वासिक, लखनऊ से मलिक, शिव नारायण कुशवाहा, पीसी कुरील, सैयद मोईद अहमद, रामकृष्ण, जैद अहमद फारूकी, अनिल आजमी, एकता सिंह, रवि शेखर, मुन्ना झा, जनमंच के दिनेश सिंह, शाह आलम, आफाक, शान ए इलाही, लक्ष्मण प्रसाद, आदियोग, धर्मेन्द्र, शिवदास, गुफरान सिद्दीकी, तारिक शफीक, समेत अनेक लोग मौजूद थे।


