प्रधानमंत्री जैसे ओहदे पर मोदीजी जैसा गैरजिम्मेदार पहले कभी नहीं देखा
प्रधानमंत्री मोदी के विरुद्ध एक एटीएम यूजर का अविश्वास मत

मधुवन दत्त चतुर्वेदी

मि. प्राइम मिनिस्टर !

मेरे बैंक ने मुझे साबिर ( संयमी या संतोषी ) मानते हुए शुक्रिया का एसएमएस किया है। जब आपने विमुद्रीकरण की घोषणा की तब मेरे पास 5280 /- रु कैश था। अगली सुबह मेरे पास चलन की मुद्रा सिर्फ 280/-रु थी।

मैं आपकी नीति का समर्थक नहीं हूँ। वह अलग बात है। मैंने अगले दिन ठप्प बैंकिंग को झेला।

फिर 10 को बैंक की लंबी कतार से दूर रहा कि ज्यादा जरूरतमंद लोगों को सुबिधा मिल सके।

मुझ पर जमा करने को कुछ खास था भी नहीं। निकालना था, उसके लिए एटीएम था और एटीएम के लिए आपका वायदा था कि 11 को चालू हो जायेंगे। वे नहीं हुए। 12 को भी नहीं। वही हाल रहा।

जरूरतें सीमित हैं और बाजार में रसूख ठीक है तो चल गया। लेकिन अब सब्र नहीं है।

हो भी क्यों ? प्रधानमंत्री जैसे ओहदे पर आप जैसा गैरजिम्मेदार और अदूरदर्शी व्यक्ति हमने पहले कभी नहीं देखा।

सिर्फ एटीएम के सम्बन्ध में आपका वायदे पर खरा न उतरना ही बग़ावत की अकेली वजह हो सकती है क्योंकि ये वायदा आपने किसी चुनावी रैली में नहीं बल्कि राष्ट्र के नाम अपने सम्बोधन में किया था।

आपके अंधभक्त बेशक इस विमुद्रीकरण को ऐतिहासिक और अभूतपूर्व कहते हों, बेशक वे इसे काले धन पर आपका महाप्रहार कहें लेकिन लोग सब जान रहे हैं। आपके फैसले पर, फैसले की नीयत पर, उसमें सूझबूझ की कमी पर और खासकर आपके प्रजापीड़क स्वभाव पर सर्वत्र उंगली उठ रही है।

आप स्टेट्समैन नहीं स्टंटमैन की छवि बना चुके हो।

आपके झूठे वायदे पर विश्वास के बाद अभी अभी किसी के आगे हाथ फैलाकर 100-100 के 5 नोट लिए हैं। इस जिल्लत का सारा श्रेय आपको है।

मैं आपके प्रति अपने अविश्वास का मत व्यक्त करता हूँ।

एक एटीएम यूजर

भारतीय नागरिक

( प्रधानमंत्री मोदी के विरुद्ध एक एटीएम यूजर का अविश्वास मत )