आज कल एक शब्द बड़ा चल पड़ा है – प्रोफेशनल । लोग समझते हैं कि जब से एक नौकरीपेशा आदमी देश का प्रधानमंत्री हुआ है तब से इस शब्द का भाव बढ़ गया है । ऐसी बात नहीं है बात – विचार की खेती करने वाले भी जब पधानमंत्री होते थे , तब भी प्रोफेशनल लोगों का भाव ताव चढ़ा – बना रहता था । तब यह सलाहकार कहलाते थे । जरा समझदार हुए तो अफसर बन जाते थे । असली बात तो यह है कि फायल की खेती पर कलम की हल और राय का बीज रोपने वाला किरानी बाबू से ले कर प्रधान सचिव बाबू भी शाश्वत प्रोफेशनल होते हैं । यह भी कह सकते हैं कि नौकरीपेशा आदमी भी बड़ा भारी प्रोफेशनल होता है । घूस लेने से काम न करने तक का प्रोफेशनल नजरिया बनाए रखना कोई आसान काम नहीं होता । काम करवाना भी एक प्रोफेशनल काम ही होता है । जरा सोचिए कि नीरा राडिया को न जाने कितने लोगों से कितनी लंबी – और चौड़ी भी प्रोफेशनल बातचीत करनी
पड़ी कि हजारों टेप बन गए । टेप सुनना , सुनवाना , उसमें से मतलब की बात निकलवाना और मतलब की जगह पर छपवाना भी एक प्रोफेशनल काम ही है ।
प्रोफेशनल कामों में एक बहुत बड़ा काम यह भी होता है कि असली बात को आप भूल जाएं । या असली बात मनोरंजनात्मक गाना बन जाए । मनोरंजनात्मक गाना बनाना भी एक प्रोफेशनल काम ही है । जरा सोचिए न गुलजार साहब या जावेद(साहब) अख्तर का दिमाग कि कितना संदेश पूर्ण मनोरंजन गाना लिख डालते हें । यह इन गानों का दबंगपन ही होता है कि मुन्नी बदनाम हो जाती है और मनी बेलगाम हो जाती है । गानों में कोई झंडु बाम हो जाता है कि दर्द हरे । पर सच में तो वह शीला की जवानी जैसी होती है जिसने तय कर रखा है कि किसी के हाथ नहीं आनी ।
ऐसी हालत में एक प्रोफेशनल आता है । यह बड़ा मजेदार प्रोफेशनल होता है ।
किसी जमाने में यही नीरा राडिया के पीछे लगा होता था । इसी के कारण पीपली लाइव जैसी नौटंकी होती है । यही सुनवाता है गाना कि ‘ पिया तो खूब ही कमात हैं ,पर महंगाई डायन खाय जात हैं । ‘ गाना खत्म । आप महंगाई डायन के बारे में सोच रहे हैं कि सिर पर मुन्नी बदनाम हो कर नाचती है । थोड़ा आराम हुआ तो शीला की जवानी चड़ कर बोलती है । फिर एक बड़ा प्रोफेशनल काम शुरु हो जाता है कि भ्रष्टाचार मिटाना है । यह तो आपको पता ही है कि भ्रष्टाचार करना और मिटाना दोनो बड़ा ही प्रोफेशनल काम है । बोफोर्स से ले कर चारा तक और चारा से ले कर मोबाइल के सितारा तक बरास्ता न्यायपालिका यह काम चल रहा है । यह प्रोफेशनल भ्रष्टाचार है कि मिटता नहीं । इसका कारण भी बड़ा प्रोफेशनल है । जैसे चीनी उत्पादन मंत्री चीनी का उत्पादन बढ़ाने की बात करता है । इसके दो फायदे हैं । छोया से दवा से ले कर शराब तक बन जाती है । मुंह भी मीठा हो जाता है । चीनी खरीदते वक्त कड़वा भी हो जाता है । अब वही चीनी मंत्री सेहत मंत्री हो जाता है तो कहता है कि चीनी कम खाइए या न खाइए कयोंकि इससे डायबिटिटज हो जाता है । इसे कहते हैं प्रोफेशनल होना । जैसे एक जमाने में हर बात पर टैक्स लगाने वाले चिदंबरम कहते हैं कि महंगाई तो टैक्स लगाने से भी ज्यादा अन्याय है । इसे ही कहते हैं प्रोफेशनल की प्रोफेशनल बात !