When, what happened in the 2G scam

अदालत ने यूपीए के ऊपर सबसे बड़े घोटाले का दाग हटाया

जानिए कब क्या हुआ कथित 2G घोटाले में

वर्ष 2010 में CAG रहे विनोद राय ने अपनी रिपोर्ट में तत्कालीन यूपीए सरकार पर 1 लाख 76 हजार करोड़ के घोटाले का दाग लगा दिया था...जिसने पूरी यूपीए-2 को हिलाकर रख दिया... इस घोटाले के घेर में उलझकर कांग्रेस सत्ता से बाहर होकर विपक्ष की भूमिका में आ गई...और भाजपा को 2G के सहारे सत्ता के शिखर तक पहुंचने का मौका मिल गया...

भाजपा के नेताओं ने पूर्व पीएम मनमोहन सिंह से लेकर सोनिया गांधी पर भ्रष्टाचार के कीचड़ को उछाला...लेकिन आज साफ हो गया कि...सीबीआई जिन दागों को पक्का बता रही थी...असल में वो कच्चे थे...कांग्रेस पाक साफ तो साबित हो गई...लेकिन सात साल तक इस केस की वजह से नेताओं को जेल के कई चक्कर लगाने पड़े...आइए आपको बताते है अब तक क्या कुछ हुआ इस केस में....

2 जी घोटाले में कब, क्‍या हुआ

1... 2007- डीएमके नेता ए राजा को दूसरी बार दूरसंचार मंत्री नियुक्त किया गया.

2…2008- दूरसंचार कंपनियों को स्पेक्ट्रम लाइसेंस दिए गए…लेकिन केंद्रीय सतर्कता आयोग ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में खामियां पाईं और दूरसंचार मंत्रालय के कुछ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की.

3...2010- कैग ने 2 जी के मोबाइल फोन का लाइसेंस देने में दूरसंचार विभाग को कई नीतियों के उल्लंघन का दोषी पाया...और एक लाख 76 हजार करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाया.

4... नवंबर 2010- कैग के इस खुलासे के बाद विपक्ष की भूमिका में बैठी भाजपा ने जो हंगामा काटा...उससे सदन की कार्यवाही ही ठप पड़ गई...विपक्ष दूरसंचार मंत्री ए राजा को हटाने की मांग पर अड़ा ही रहा..जिसके बाद 14 नवम्बर राजा ने इस्तीफा दे दिया...इसके बाद कपिल सिब्बल को दूरसंचार मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया...लेकिन बावजूद इसके विपक्ष का हंगामा शांत नहीं हुआ...और विपक्ष ने टू जी स्पेक्ट्रम आवंटन की जांच के लिए जेपीसी गठित करने की मांग को लेकर संसद में बवाल काटा...

5...13 दिसम्बर 2010- विपक्ष के बवाल के बाद दूरसंचार विभाग ने उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश शिवराज वी पाटिल समिति को स्पेक्ट्रम आवंटन के नियमों एवं नीतियों को देखने के लिए अधिसूचित किया.

6... दो फरवरी 2011: टू-जी स्पेक्ट्रम मामले में राजा, पूर्व दूरसंचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरा और राजा के पूर्व निजी सचिव आर के चंदोलिया को सीबीआई ने गिरफ्तार किया.

7...2 अप्रैल, 2011: सीबीआई ने पहला आरोपपत्र दाखिल किया..जिसमें आरोप लगाया गया कि...नियम कायदों को दरकिनार कर 2 जी स्पेक्ट्रम की नीलामी षडयंत्र पूर्वक की...2008 में साल 2001 में तय की गई दरों पर स्पेक्ट्रम को बेचा गया...इसके आलावा राजा पर यह भी आरोप है कि उन्होंने अपनी पसंदीदा कंपनियों को पैसे लेकर गलत ढंग से स्पेक्ट्रम आवंटित कर दिया।

8...इस मामले में ए राजा के अलावा राज्‍यसभा सांसद कनिमोई समेत 17 लोगों को आरोपी बनाया गया...कनिमोई पर आरोप है कि...उन्होंने अपने टीवी चैनल के लिए 200 करोड़ रुपयों की रिश्वत डीबी रियलटी के मालिक शाहिद बलवा से ली...बदले में उनकी कंपनियों को ए राजा से गलत ढंग से स्पेक्ट्रम दिलाया।

9...इस मामले में आरोप पत्र दाखिल होने के बाद 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने 2जी लाइसेंस के आवंटनों को रद्द किया...

10...कोर्ट के इस आदेश के बाद कई बाद ए राजा और कनिमोई को कई बार जेल भी जाना पड़ा...करीब सात साल तक ट्रायल चलने और 80,000 पेज की चार्जशीट दाखिल होने के बाद आज आखिरकार कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया,...सीबीआई की विशेष अदालत ने ए राजा और कनिमोई को बरी कर दिया...साथ ही कांग्रेस के ऊपर से सबसे बड़े घोटाले का दाग भी हटा दिया.