युगपुरुष अरविंद केजरीवाल और शिगूफ़ेपन की राजनीति।
आलोक वाजपेई
अरविंद केजरीवाल सरकार का ऑड इवन ड्रामा केवल एक शिगूफ़ा था। केवल ऊट-पटांग हरकतें करना और लोगों को भरमाये रखना।
याद रखिये कल्याणकारी राज्य के तहत कोई कदम उठाना जिससे गरीबों और समाज के निचले तबकों को त्वरित राहत मिल सके एक बात है और ड्रामेबाजी नाटक करके बड़ी-बड़ी समस्याओं को चुटकी में खत्म करने की हवाई बातें बोलना एक अलग बात है।
पर्यावरण प्रदूषण की समस्या एक विकराल विश्वव्यापी समस्या है जिसके तार सीधे पूंजीवादी समाज और अर्थव्यवस्था से जुड़े हैं। इनका कोई भी छोटा-बड़ा उपाय होगा तो वह कुछ मूलभूत संरचनात्मक बदलावों की मांग करेगा। अगर किसी क्षेत्र विशेष में कोई सरकार तुरंत उपाय करके वाहन प्रदूषण को ईमानदारी से दूर या कम करना ही चाहेगी तो उसका पहला कदम नयी गाड़ियों की बिक्री पर यथोचित प्रतिबन्ध लगाना होना चाहिए और जर्जर पुरानी गाड़ियों को नष्ट करना होना चाहिए। ऑड इवन को 15 दिन के लिए लागू करना और फिर इसकी सफलता का जश्न मनाना केवल शोशेबाजी और लोगों को तार्किक सोच से गुमराह करना है।
यह जो ड्रामेबाजी भरी मक्कारी पूर्ण चालें हैं वो केवल दीर्घ काल में फासीवाद की जमीन को और पुख्ता करेंगी।