फीस बढ़ोतरी के विरोध में हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में छात्र आंदोलित
फीस बढ़ोतरी के विरोध में हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में छात्र आंदोलित
नई दिल्ली। महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में फीस बढ़ोतरी के विरोध में छात्रों द्वारा कुलपति कार्यालय के बाहर विरोध जारी है।
गौरतलब है कि महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा को नैक की टीम ने 'ए' ग्रेड दिया है। विश्वविद्यालय परास्तक और शोध पाठ्यक्रमों के अलावा जल्द ही स्नातक स्तर पर भी कुछ पाठ्यक्रम शुरू करने के प्रयास में है।
वर्धा से कुमार गौरव ने यह जानकारी देते हुए कहा कि महात्मा गांधी ने कहा था 'राष्ट्रभाषा के बिना कोई भी राष्ट्र गूंगा हो जाता है'। भारत की संसद द्वारा एक अधिनियम पारित करके महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय की स्थापना राष्ट्रपिता की कर्मभूमि वर्धा में की गई। उन्होंने कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान के फीस बढ़ोतरी को मामले को आलू-प्याज़ के दाम की बढ़ोतरी तथा बढ़ते हुए महँगाई से जोड़ कर नहीं देखा जा सकता है। यह एक जाति-वर्ग के शिक्षा के अधिकारों तथा उनके उत्थान से जुड़ा मामला होता है। हमें सोचना होगा, कि कहीं सरकार फीस बढ़ोतरी कर शिक्षा का निजीकरण करने की तरफ कदम बढ़ते हुए इसे कॉर्पोरेट के हाथों बेचने की साजिश तो नहीं कर रही है?
कुमार गौरव ने कहा हमें सोचना होगा, कि कहीं फीस बढ़ा कर सरकार किसी खास जाति-वर्ग के लोगों को शिक्षा से दूर तो नहीं रखना चाहता? उन्होंने सवाल किया कि क्यों रक्षा सहित कई सारे बजट बढ़ाए जा रहे हैं तथा शिक्षा के सारे बजटों में कटौती की जा रही है? क्यों सरकार हमें सिर्फ साक्षर बनाना चाहती है शिक्षित नहीं?
कुमार गौरव ने कहा- आज जब देश भर में छात्र, मजदूर, किसान, दलित, आदिवासी तथा महिलाओं पर सत्ता का दमन तेज हो रहा तथा उन्हे उनके अधिकारों से वंचित रखने की साजिश रची जा रही है, उसी कड़ी में ही महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय (वर्धा) का यह फैसला आया है जिसमें नए सत्र के सभी कोर्स के फीस लगभग 200-400% बढ़ा दिये गए हैं। लेकिन तमाम दमन-शोषण के विरुद्ध जिस तरह दुनिया भर के लोग गोलबंद हो कर लड़ रहे हैं ठीक उसी प्रकार विश्वविद्यालय के छात्र भी संघर्ष कर रहें हैं। आज उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलपति कार्यालय के सामने धरना दिया। उनकी मांग है कि "बिना देर किए तथा बिना किसी शर्त के तत्काल फीस बढ़ोतरी के फैसले को वापस लिया जाए"।


