फॉरेंसिक ऑडिट होगा भूषण स्टील खातों का
फॉरेंसिक ऑडिट होगा भूषण स्टील खातों का
मुम्बई। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की अगुआई वाले ऋणदाता समूह ने कर्ज के बोझ तले दबी भूषण स्टील पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। ऋणदाता बैंकों ने कंपनी के बहीखातों का फॉरेंसिक ऑडिट कराने का फैसला किया है। इसके लिए बैंक किसी प्रतिष्ठित ऑडिट कंपनी की सेवा लेंगे और भूषण स्टील के निदेशक मंडल में अपने तीन प्रतिनिधियों को भी नियुक्त करेंगे। बैंकों ने यह फैसला भूषण स्टील के वाइस चेयरमैन और प्रबंध निदेशक नीरज सिंघल की गिरफ्तारी के बाद किया है। सिंघल को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने सिंडिकेट बैंक के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक एस के जैन को रिश्वत देने के आरोप में गिरफ्तार किया है। इसी मामले में जैन को भी गिरफ्तार किया गया है।
वित्तीय संकट से जूझ रही भूषण स्टील ने 51 बैंकों ने करीब 40,000 करोड़ रुपये का ऋण लिया है। यह कर्ज कार्यशील पूंजी ऋण और सावधि ऋण के तौर पर दिया गया था। हालांकि यह कर्ज अभी तक मानक कर्ज की श्रेणी में है यानी उसे फंसा हुआ कर्ज करार नहीं दिया गया है। बैंकरों का कहना है कि कंपनी का परिचालन संतोषजनक तरीके से हो रहा है लेकिन नकदी की किल्लत है। बैंक मुस्तैदी दिखा रहे हैं ताकि कंपनी को दिया गया यह ऋण गैर-निष्पादित आस्तियों में तब्दील न हो सके। भूषण स्टील को कार्यशील पूंजी ऋण देने वाले एसबीआई ने आज नई दिल्ली में बैंकों की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें कंपनी के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। बैंकों ने एक अन्य ऑडिट कंपनी की नियुक्ति करने का फैसला किया, जो कंपनी के रोजमर्रा के नकदी प्रवाह पर नजर रखेगी। इसके अतिरिक्त एक स्वतंत्र इंजीनियर कंपनी के परिचालन और विस्तार योजनाओं पर नजर रखेगा।
कर्जदाता बैंकों के समूह के सदस्य और सावधि ऋण देने वाले बैंकों का नेतृत्व कर रहे पंजाब नैशनल बैंक ने एक बयान में बताया, 'भूषण स्टील ने इस बात की पुष्टिï की है कि कंपनी का पेशेवर प्रबंधन बरकरार है और उसका परिचालन सामान्य रूप से हो रहा है।' बैंकों ने गौर किया है कि उत्पादन और मूल्य के लिहाज से कंपनी के प्रदर्शन में अनुमान के मुताबिक सुधार दिख रहा है। बयान में कहा गया, 'बैंकों ने कंपनी के प्रदर्शन की समीक्षा की और यह पाया कि अभी तक उसका परिचालन सामान्य और संतोषजनक ढंग से चल रहा है।'
बैंक ने कंपनी को इक्विटी डालकर ऋण घटाने के लिए कहा है लेकिन कंपनी का कहना है कि इसमें समय लगेगा। नतीजतन कंपनी को उसकी कुछ गैर-प्रमुख परिसंपत्तियों को बेचकर रकम जुटाने को कहा गया है। वित्त वर्ष 2014 में भूषण स्टील की कुल बिक्री में 2013 के मुकाबले 10 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी, जबकि इसके परिचालन लाभ में 18.3 फीसदी और शुद्घ लाभ में 93.2 फीसदी की गिरावट आई थी। वित्त वर्ष 2013 की तुलना में 2014 के दौरान ब्याज पर खर्च 29.2 फीसदी बढ़कर 1,663 करोड़ रुपये हो गया था कंपनी के परिचालन मुनाफे का 60 फीसदी हिस्सा उसकी भेंट चढ़ गया था। पिछले तीन साल के दौरान कंपनी की शुद्ध बिक्री करीब 50 फीसदी बढ़ी है, लेकिन उसी दौरान उस पर ब्याज का बोझ तीन गुना हो गया है। हालात ऐसे ही रहे तो तो वित्त वर्ष 2015 के अंत तक कंपनी के पास शायद ब्याज चुकाने लायक नकदी भी नहीं बचेगी।
साभार- बिज़नेस स्टैंडर्ड


