बनारस हमारी सांझी संस्कृति की विरासत का शहर है
बनारस हमारी सांझी संस्कृति की विरासत का शहर है
बनारस हमारी सांझी संस्कृति की विरासत का शहर है
दो दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न
वाराणसी, २० सितम्बर २०१६. युवा सामाजिक बदलाव में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं. उन्हें निखारने के लिये, गढ़ने और सामाजिक मुद्दों पर काम करने के लिये, उन्हें गढ़ने और सामाजिक मुद्दों पर युवाओं को प्रेरित करने के लिए आयोजित दो दिवसीय शिविर में प्रशिक्षार्थियों को संबोधित करते हुए इंसाफ के राज्य संयोजक और कार्यशाला समन्वयक डॉ० मोहम्मद आरिफ़ ने कहा कि इस कार्यशाला का आयोजन सेंटर फार हार्मोनी एंड पीस, शान्ति सद्भावन मंच, इंसाफ और भारतीय सामजिक संसथान के संयुक्त तत्वावधान में किया गया, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय एकता, शान्ति एवं न्याय के लिए कार्य करने के लिए कार्यकर्ताओं को तैयार करना है।
इसके उदघाटन कार्यक्रम में बनारस शहर के प्रबुद्ध सामजिक कार्यकर्त्ता शामिल हुए, जिसमे प्रो० आनंद दीपायन, डॉ० लेनिन रघुवंशी और भारतीय सामजिक संस्थान के निदेशक डॉ० डेंजिल फर्नांडीज व फादर जॉय उपस्थित रहे।
इस प्रशिक्षण कार्यशाला में ९ राज्यों से लगभग ४० प्रशिक्षु प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
प्रशिक्षण के तीसरे दौर में धर्मनिरपेक्षता, सांझी संस्कृति, संवैधानिक मूल्यों एवं मीडिया और साम्प्रदायिकता की भूमिका और उत्तरदायित्व जैसे विषयों पर प्रतिभागियों ने अपने-अपने शोध पत्रों को प्रस्तुत किया।
कार्यशाला में भारतीय सामजिक संस्थान के निदेशक फादर डेंजिल फर्नांडीज ने सम्पूर्ण शोध पत्रों पर अपनी बात रखते हुए कहा कि इस तरह के सामाजिक मुद्दों पर प्रशिक्षण से प्रशिक्षित युवा अपने क्षेत्र में जाकर सामाजिक मुद्दों और न्याय के लिए पहल करेंगे।
दिल्ली से आये फादर जॉय ने कहा कि सांझी संस्कृति भारतीय विविधता को बनाये रखने के लिए हमें इस प्रकार के शान्ति दूतों को तैयार करने की अत्यंत आवश्यकयता है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के समन्यवयक डॉ० राजेंद्र फुले ने कहा कि इसी धरती से कबीर ने सभी समुदायों के बिच प्रेम का सन्देश दिया। बनारस हमारी सांझी संस्कृति की विरासत का शहर है।
आल इंडिया सेकुलर फोरम मध्य प्रदेश के राज्य कन्वीनर दीपक भट्ट ने कहा कि मीडिया को जन सामाजिक मुद्दों पर ज्यादा फोकस करने की आवश्यकता है। उसे समाजिक हासिए के लोगों के लिए सामजिक न्याय के लिए पहल करने की जरूरत है।
दो दिवसीय कार्यशाला में मुख्य रूप से अर्चना, अंशु माला, नमिता, मैरी ममता , सुमन बारा, धम्मपाल जय प्रकाश, अनवर हुसैन, चक्रधर, अनूप राजीव जी मौजूद रहे।
कार्य क्रम का संचालन सुरेश कुमार “अकेला“, लाल प्रकाश “राही “ ने सत्रवार किया।


