बहनजी एक संकल्प लीजिए कि अब कोई भी बेटी या बहन को समाज इतना मजबूर न करे कि उसे ....
बहनजी एक संकल्प लीजिए कि अब कोई भी बेटी या बहन को समाज इतना मजबूर न करे कि उसे ....
बहनजी मायावती को खुला पत्र
आदरणीय मायावती
बसपा प्रमुख, लखनऊ, उत्तर प्रदेश।
सादर नमस्कार।
बहन मायावती आप हिंदुस्तान के एक भाषाई मजदूर का नमस्कार स्वीकार करेंगी या नहीं, फिर भी मैं आपको नमस्कार करता हूं। ...क्योंकि जबसे मैंने होश संभाला है, तबसे उत्तर प्रदेश में दो ही योग्य मुख्यमंत्री हुए हैं। एक भाजपा से कल्याण सिंह दूसरी आप। हालांकि, कल्याण सिंह के ऊपर एक दाग है जिसके लिए उन्हें कभी माफ नहीं किया जा सकता है। आप दोनों के तेवर मुझे हमेशा अच्छे लगे।
कल्याण सिंह से तो एक बार मिलने का लाभ भी मिला। पर आपसे मिलने का कोई अवसर नहीं मिल पाया या कहिए कि कोई संयोग नहीं बन पाया।
खैर बहनजी आज नहीं तो कल तो आपसे एक बार जरूर मिलूंगा।
उत्तर प्रदेश भाजपा इकाई के उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह ने पिछले दिन मेरे गृह जनपद में जिस तरह से आपके व्यक्तित्व को लेकर जो फूहड़ टिप्पणी की, उससे पूरा समाज आहत है। होना भी चाहिए। उस टिप्पणी के बाद उत्तर प्रदेश में जिस तरह का ड्रामा हो रहा है वह सबसे अधिक निदंनीय है। दयाशंकर सिंह की पत्नी स्वाति सिंह जिस तरह अब खुलकर एक मां होने का रोना रो रही हैं, वह तो और अधिक हास्यास्पद लग रहा है।
इस पूरी लड़ाई में भाजपा और आपकी पार्टी के लोग भी असली समस्या को दरकिनार करके राजनैतिक रोटी सेंकने में लगे हुए हैं, जो रत्ती भर भी सही नहीं है।
बहन मायावती आपसे जो असल बात कहनी है वह यह है कि भाजपा के तथाकथित नेता दयाशंकर सिंह ने आपके ऊपर जो टिप्पणी की है, उससे आप बहुत आहत हैं। मैं आपके दर्द को समझ सकता हूं। एक पुरूष जब भी लाचार होता है, तो वह सबसे पहले यही फूहड़ शब्द एक स्त्री को सौंपता है। यह एक पुरूष समाज की सबसे बड़ी कमजोरी है।
खैर वे लोग टुच्चे हैं, वे लोग इसी तरह का शब्द प्रयोग करेंगे।
लेकिन मेरा आपसे निवेदन है कि अब आप मुख्यमंत्री बनें या न बनें, सबसे पहले आप अब एक संकल्प लीजिए कि अब उत्तर प्रदेश की कोई भी बेटी या बहन को समाज इतना मजबूर न करे कि उसे इस पेशे को अपनाना पड़े।
बहन मायावती आप ताकततवर हैं, साथ में एक स्त्री भी। एक स्त्री इस पेशे में कैसे खुद को महसूस करती होगी, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। एक मुहिम छेड़िए कि अब समाज में कोई भी ताकतवर पुरूष किसी भी तरह का कोई रैकेट नहीं चला सकता है। उन बहनों को कोठों से मुक्त कराकर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़िए।
मुझे उम्मीद है कि आप सत्ता के मद को अगर कुछ समय के लिए भूल जाती हैं, तो निश्चित ही आप इस काम को अंजाम दे सकती हैं। लेकिन आपके साथ भी समस्या है कि आप देवी बन जाती हैं।
यह तमगा अपने ऊपर से उठाकर फेंकिए और उत्तर प्रदेश में एक नए विचार को जन्म दीजिए।
आपको तो मालूम ही होगा कि उत्तर प्रदेश में सालाना कितनी स्त्रियां पुरूषों के अत्याचार का शिकार होती हैं।
बहन जी इस बार आप चुनाव में इस विषय को अपना एजेंडा बनाइए।
प्रतिक्रिया छोड़िए बहन जी। समाज के विकास की बात करिए।। कायदे से तो आप दयाशंकर सिंह की पत्नी को भी अपने साथ इस आंदोलन में जोड़ लीजिए। उनका रोना तो मुझे पूरी तरह से ड्रामा ही लग रहा है। कल तक जो उन्हें जानता नहीं था, आज वह एक चेहरा बन गई हैं।। बहन मायावती आप इस काम को अंजाम दीजिए जिससे पूरा स्त्री समाज आपका शुक्रगुजार रहेगा।।
नीतीश मिश्र


