बिजली संकट सरकारों की नीतियों की देन- दिनकर
बिजली संकट सरकारों की नीतियों की देन- दिनकर
आइपीएफ शहर इकाई की हुई बैठक
सोनभद्र, 26 अगस्त। पूरे प्रदेश में छाए गहरे बिजली संकट का कारण पिछले बीस वर्षों के दौरान केन्द्र व राज्य में बनी सरकारों की निजीकरण करने वाली कारपोरेटपरस्त नीतियां है। इन सरकारों ने देश में ऊर्जा के प्रमुख प्राकृतिक संसाधन कोयले की इतने बड़े पैमाने पर लूट की है कि आज तापीय परियोजनाओं के पास बिजली पैदा करने के लिए कोयला तक नहीं है। इस बात की पुष्टि कल सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आए निर्णय में भी हुई है। देश के प्रमुख बिजली के सार्वजनिक उत्पादन गृहों को निजीकृत करने के लिए बर्बाद कर दिया गया। इसलिए इन नीतियों को बदले बगैर बिजली संकट का स्थायी हल नहीं हो सकता।
यह बातें आज आल इण्डिया पीपुल्स फ्रंट (आइपीएफ) की नगर इकाई की बैठक को सम्बोधित करते हुए आइपीएफ प्रदेश संगठन प्रभारी दिनकर कपूर ने कहीं। उन्होंने कहा कि बड़ी-बड़ी लफ्फाजी करने वाली मोदी सरकार अपने ही बिजली उत्पादन गृहों को कोयला मुहैया नहीं करा पा रही है। सोनभद्र जैसा जिला जो प्रदेश की आधी से ज्यादा बिजली पैदा करने की क्षमता रखता है उसके नागरिकों को अंधेरे में दिन गुजारना पड़ रहा है। आइपीएफ बिजली संकट की सच्चाई जनता के सम्मुख लाने के लिए शीध्र ही जनजागरण अभियान चलायेगा।
बैठक में निर्माण मजदूरों के लिए सरकार द्वारा चलायी जा रही योजनाओं का लाभ श्रमिकों को दिलाने के लिए चैतरफा प्रयास करने और उन्हें उ0 प्र0 निर्माण मजदूर मोर्चा का सदस्य बनाने का निर्णय हुआ।
बैठक में नगर संयोजक मोहम्मद हनीफ, मोहम्मद अकबर, जिला प्रवक्ता रमेश सिंह खरवार, राजाराम भारती, प्रेम भारती, राजनाथ कुशवाहा, मुन्ना कोल, किशन कनौजिया आदि लोग उपस्थित रहे।


