जुगनू शारदेय

जब लालटेन नहीं था तो बूटा सिंह का साल भरी राजपाट था । तो बचा 15 साल । यह एनडीए के खाता में जाता है कि 15 साल ,बुरा हाल । खैर ,अब बिहार का नाम ऊंचा करना चाहती है कांग्रेस । स्वागतम् । इसके लिए विज्ञापन देती है कि नीतीश सरकार जवाब दो / पाई पाई का हिसाब दो ।

राहुल बाबू 14 अक्तूबर को बिहार आए । बिहारी सूरमा लालटेनी , बिहार सूरमा बंगलाई और बिहारी सूरमा तीरंदाज , उस इलाके से वोट मांग कर दूसरा इलाका पकड़ चुके हैं । अब राहुल बाबू जाएंगे काटिहार के कोढ़ा में , अररिया के सिकटी में और सुपौल के निर्मली में । पर नहीं जाएंगे तो सदाकत आश्रम के बाहर नहीं जाएंगे ,जहां कांग्रेस वर्कर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं । यहां भी वही रोग की टिकट में पक्षपात हुआ । क्या जमान आ गया है । एक टिकट के लिए लोग पक्षपात कर रहे हैं । जबकि कांग्रेस साबित करना चाहती है कि वह बिहार के साथ पक्षपात नहीं कर रही है । वह तो टेलीविजनीय विज्ञापन से साबित करना चाहती है कि 20 साल से पैसेंजर की रफ्तार से चल रही है । कितना आसान है भूल जाना कि इसमें से पांच साल -2000 से 2005 तक लालटेन कांग्रेस के हाथ पर टिका हुआ था । जब लालटेन नहीं था तो बूटा सिंह का साल भरी राजपाट था । तो बचा 15 साल । यह एनडीए के खाता में जाता है कि 15 साल ,बुरा हाल । खैर ,अब बिहार का नाम ऊंचा करना चाहती है कांग्रेस । स्वागतम् । इसके लिए विज्ञापन देती है कि नीतीश सरकार जवाब दो / पाई पाई का हिसाब दो ।
नीतीश सरकार कहती है कि हम केंद्र से पाई पाई का हिसाब लेंगे । चुनाव के वक्त हिसाब मांग रहे हो । तुम कांग्रेस पार्टी हो कि चुनाव आयोग जो पाई पाई का हिसाब मांग रहा है । कांग्रेस का दावा है कि कुल मिला कर 24 हजार 7 सौ 75 करोड़ दिया जिसमें से खर्च हुआ 15हजार 3 सौ 69 करोड़ । अरे राहुल बाबू जो खर्च हुआ ,वह भी अफसरशाही है , जो खर्च न हुआ वह भी अफसरशाही है । बिहार में कोई राष्ट्रमंडल का खेल तो हो नहीं रहा है कि पैसा आसानी से खर्च हो जाए । बिहार कम खर्च ,बाला नशीं में विश्वास करता है ।
कांग्रेसी बिहार को तेज गाड़ी बनाना चाहते हैं । उन्हें बिहार के जीवन दर्शन के बारे में मालूम ही नहीं । सेर भर सतुआ , मधुरी चाल / आज न पहुंचब , पहुचब काल ।
अब तो यही जीवन दर्शन भारतीय रेल का भी हो गया । देर से चलती है । देर से पहुंचती है । आप भी राहुल बाबू बिहार में देर से चले हो तो देर से ही पहुंचोगे । निराश होने की आवश्यकता नहीं है । आपकी तरक्की बिहार में निराली होगी । वो बिहार में कहते हैं न कि माल महराज का मिर्जा खेलें होली । जीतने वाले जीत जाएंगे आप आएं न आएं । पत आ गए हो तो खबर बनेगी ही । आप न आते तो आज हम क्या लिखते । यहां तो एक से बढ़ कर बलबोले हैं । हर पार्टी में टिकट के झमेले हैं । आप तो मधुर भाषी हो । राजपाट के संन्यासी हो । बिहार विकास के कम ऊत्तर प्रदेश में राजपाट के अभिलाषी हो ।
आते रहिए बिहार । पर फोकट में जन सभा कर समय न बरबाद करें अपना । नीतीश कुमार महिलाओं को आगे बढ़ाना चाहते हैं । पर हीरो तो आप हो महिलाओं के । बिहार में भी कलावतियों की कमी नहीं है । चुनाव बाद आओ , किसी कलावती को फिर से खबर बनाओ। हम तो बोर हो गए हैं बिहार के बड़बोले से । कहा जाता है कि हवा पानी का असर होता है । अगर आप भी हो जाओ बिहार में बड़बोले तो क्या हुआ बम बम भोले ।