हमारा व्यापमं
कितना निरुपम - कितना अनुपम
कितना व्यापक - हमारा व्यापमं
कितना कातिल - कितना ज़ालिम
कितना शातिर - हमारा व्यापमं
कितना बेशर्म - कितना बेवफ़ा
कितना पाखंडी - हमारा व्यापमं
कितना दादा - कितना गुंडा
कितना माफ़िया - हमारा व्यापमं
" बुलंद म प्र की बुलंद तस्वीर-हमारा व्यापमं "
// जसबीर चावला //
जसबीर चावला, व्यंग्यकार व कवि हैं।