बेगुनाहों की रिहाई पर वादाखिलाफी और दंगों के लिये सपा हुकूमत को याद करेगी जनता- मो0 शुऐब
बेगुनाहों की रिहाई पर वादाखिलाफी और दंगों के लिये सपा हुकूमत को याद करेगी जनता- मो0 शुऐब
मदरसों पर लगाये गये आतंकवाद के धब्बे को मिटाने के लिये
मदरसे के छात्र शामिल हों घेरा डालो-डेरा डालो आंदोलन में
प्रशांत राही की रिहाई के लिये कल हुआ हजरतगंज पर विरोध
लखनऊ, 6 सितम्बर 2013। रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुऐब ने कहा है कि पिछले चालीस दिनों में प्रदेश में पंद्रह साम्प्रदायिक घटनाएं हो चुकी हैं जिससे समझा जा सकता है कि सपा हुकूमत में साम्प्रदायिकता फैलाना एक नीतिगत कार्यक्रम बन गया है।
श्री शुऐब ने कहा कि किसी भी राज्य में इस बड़े पैमाने पर आजाद भारत में कभी भी दंगे नहीं हुये हैं। आने वाली पीढ़ियाँ सपा हुकूमत को सिर्फ और सिर्फ दंगे कराने के लिये याद करेंगी। इस साम्प्रदायिक और दंगायी सरकार को उखाड़ फेकने के लिये सभी इंसाफ पसंद और लोकतंत्र पसन्द लोगों को एक साथ आना होगा। रिहाई मंच आतंकवाद के नाम पर कैद निर्दोषों के साथ ही दंगे के सवाल पर सूबे की हुकूमत को घेरने का काम विधान सभा सत्र के दौरान आयोजित होने वाले डेरा डालो-घेरा डालो आंदोलन में करेगी। जिसमें दंगा पीड़ित भी शामिल होंगे।
रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुऐब ने कहा कि आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाहों के मसले पर जिस तरह सपा सरकार ने चुनाव में गुमराह करने का काम किया उसे मुस्लिम समाज कभी माफ नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज को सपा के मुस्लिम विधायकों से पूछना चाहिए कि आतंकवाद के नाम पर कैद नौजवानों की रिहाई से वादा खिलाफी करने वाली सरकार के साथ आज भी वे क्यूं खड़े हैं और क्यों बेशरमी के साथ अपनी गाड़ियों पर दंगाई सरकार के 2014 के लक्ष्य का बैनर लगाये घूम रहे हैं। उन्होंने कहा कि सपा के मुस्लिम विधायकों और मंत्रियों को रिहाई मंच ने खुला खत लिख कर उनसे ये सवाल पूछे थे लेकिन एक भी सपा नेता ने उन सवालों का जवाब नहीं दिया। जिससे साबित होता है कि सपा के मुस्लिम नेता मुलायम और शिवपाल कुनबे के सिर्फ मोहरे भर हैं।
धरने को सम्बोधित करते हुये मुस्लिम मजलिस के जैद अहमद फारूकी और भारतीय एकता पार्टी के सैयद मोईद अहमद ने कहा कि सपा को पिछले बीस साल में मुस्लिमों के हितों में किये गये कामों का विवरण देना चाहिए। उन्हें बताना चाहिए कि उन्होंने बाबरी मस्जिद के गिराये जाने की साजिश की जानकारी होने के बावजूद उसे बचाने के लिये क्यों कुछ नहीं किया, बाबरी मस्जिद विध्वँस के नेताओं पर दर्ज मुकदमे कमजोर करने की कोशिशें उन्होंने क्यों की, कल्याण सिंह से हाथ क्यों मिलाया उनके बेटे को सदन में क्यों पहुँचाया, अमरीका से न्यूक्लीयर डील क्यों कराया, शिवपाल यादव को बार-बार इजरायल का दौरा क्यों कराया, सूबे के एटीएस अधिकारियों को इजरायल और अमरीका टेªनिंग के लिये क्यों भेजा?
उन्होंने कहा कि सपा का यादव-मुस्लिम समीकरण अब टूट चुका है। सौ से ज्यादा हुये दंगों में सपा के नेताओं की मिलीभगत से साबित हो गया है कि सपा अब खुलकर संघ परिवार के एजेंडे पर काम कर रही है। जिसका खामियाजा उसे 2014 में भुगतना पड़ेगा। रिहाई मंच इन्हीं सवालों को अवाम के बीच ले जा रहा है और इन्हीं सवालों पर 16 सितम्बर से विधान सभा के सामने डेरा डालो-घेरा डालो का आयोजन कर रहा है।
हारिस सिद्दीकी और पिछड़ा समाज महासभा के एहसानुल हक मलिक ने कहा कि अगर मानसून सत्र में सप सरकार ने निमेष कमीशन की रिपोर्ट पर कार्रवायी रिपोर्ट नहीं लाती है और दोषी पुलिस अधिकारियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित नहीं करती है तो सदन नहीं चलने दिया जायेगा। रिहाई मंच इसकी चेतावनी के लिये 15 सितम्बर को विधान सभा के सामने रिहाई मशाल मार्च निकालेगा।
इस मौके पत्रकार शिवदास प्रजापति, हरे राम मिश्र और गुफरान सिद्दीकी ने कहा जिस तरीके से चाहे वो मरहूम मौलाना खालिद, तारिक कासमी हों या कश्मीर के गुलजार वानी, सज्जादुर्रहमान वानी या अख्तर वानी हों इन जैसे हजारों बेगुनाह लड़के जेलों में इसलिये बंद हैं कि चाहे वह देवबंद का दारूल उलूम देवबंद हो आजमगढ़ का जमातुलफलाह या फिर लखनऊ का नदवा हो इन सभी शिक्षण संस्थानों पर सरकारें और आईबी मदरसा कम आतंकवाद का सेंटर ज्यादा मानते हैं। और बाटला हाऊस के बाद जिस तरीके से शिबली नेशनल कालेज और आजमगढ़ के मदरसों पर निशाना साधते हुये पूरे मुस्लिम समुदाय को इस कदर बदनाम कर दिया कि लोग आजमगढ़ का नाम लेने से डरने लगे। ऐसे वक्त में इन मदरसों और शिक्षण संस्थानों की यह जिम्मेदारी बन जाती है कि वे रिहाई मंच द्वारा चलाए जाने वाले आंदोलन के घेरा डालो-डेरा डालो अभियान में ज्यादा से ज्यादा शामिल हों।
रिहाई मंच के प्रवक्ताओं राजीव यादव और शाहनवाज आलम ने कहा कि कल 5 सितम्बर को पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत राही की गिरफ्तारी के खिलाफ जीपीओ पर किये गये प्रदर्शन में गिरफ्तारी की निंदा करते हुये उन्हें तत्काल रिहा करने की माँग की गयी। इस दौरान लोगो ने कहा कि सरकार माओवाद के खिलाफ मुहिम चलाने के नाम पर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर रही है। यदि सरकार को लगता है कि इससे माओवाद थम जायेगा तो वह मुगालते में है।
यूपी की कचहरियों में 2007 में हुये धमाकों में पुलिस तथा आईबी के अधिकारियों द्वारा फर्जी तरीके से फंसाए गये मौलाना खालिद मुजाहिद की न्यायिक हिरासत में की गयी हत्या तथा आरडी निमेष कमीशन रिपोर्ट पर कार्रवायी रिपोर्ट के साथ सत्र बुलाकर सदन में रखने और आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाहों को छोड़ने की मांग को लेकर रिहाई मंच का धरना शुक्रवार को 108 वें दिन भी लखनऊ विधानसभा धरना स्थल पर जारी रहा।


