केन्द्र सरकार का मानना है कि देश के बेघरों की सुध लेना उसका दायित्व नहीं है बल्कि यह राज्यों की जिम्मेदारी है।
आवास और शहरी गरीबी उपशमन मन्त्री कुमारी सैलजा ने राज्‍य सभा में एक प्रश्‍न के लिखित उत्‍तर में बताया कि आवास और शहरीकरण राज्‍य के विषय हैं। इसलिये आश्रय स्‍थल उपलब्‍ध कराना मूलत: राज्‍य सरकारों का दायित्‍व है। वैसे केन्द्र सरकार विभिन्‍न स्‍कीमों के जरिए राज्‍यों को वित्‍तीय सहायता उपलब्‍ध कराती है। वर्तमान में केन्द्र सरकार जवाहरलाल नेहरू शहरी नवीकरण मिशन के तहत स्‍लमवासियों को आश्रय, पट्टे की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाएं, ‘साझेदारी में किफायती आवास’ के जरिए किफायती आवासों के निर्माण तथा शहरी गरीबों के आवास के लिए ब्‍याज सब्सिडी स्‍कीम (आईएसएचयूपी) के तहत 5 प्रतिशत ब्‍याज सब्सिडी समेत आवास ऋणों की घटी लागत तथा स्‍लम (आईएसएचयूपी) के तहत पाँच प्रतिशत ब्‍याज सब्सिडी समेत आवास ऋणों की घटी लागत तथा स्‍लमवासियों को सम्पत्ति का अधिकार देने के इच्‍छुक राज्‍यों को स्‍लम पुनर्विकास हेतु उपयुक्‍त आश्रय, बुनियादी नागरिक एवं सामाजिक सेवाओं के प्रावधान और किफायती आवासों के निर्माण के लिए वित्‍तीय सहायता उपलब्‍ध करा रही है।

विगत में वर्ष 1988-89 से इस मंत्रालय ने ‘शहरी बेघरों के लिए रेन बसेरे’ सम्बंधी स्‍कीम के तहत आश्रय स्‍थलों के निर्माण के लिये राज्‍यों को वित्‍तीय सहायता उपलब्‍ध करायी थी। संचयी रूप से पूर्ववर्ती शहरी फुटपाथ वासियों के लिये रैन बसेरे सम्बंधी स्‍कीम के तहत 97 स्‍कीमें, जिनके तहत 15 राज्‍यों/संघशासित प्रदेशों को कवर करते हुये अन्‍यों के साथ-साथ 17341 बिस्‍तरों, 15603 शौचालय सीटों, 2015 स्‍नानघरों और 2102 पेशाबघरों की मांग, मंजूर की गी। यह स्‍कीम वर्ष 2005-06 में राज्‍य क्षेत्र को स्‍थानान्तरित कर दी गयी और केन्द्र से दी जाने वाली वित्‍तीय सहायता बन्द कर दी गयी।
<इनपुट पी आई बी Release ID 10525>